उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव नोएडा से चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। ‘समानता भाईचारा रैली’ और PDA फॉर्मूले के जरिए कमजोर किले को फतह करने की तैयारी।

Akhilesh Yadav
Greater Noida (Dadri): उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 अभी भले ही दूर हों, लेकिन सियासी गलियारों में हलचल शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 की सत्ता हासिल करने की अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है। पार्टी का चुनावी अभियान नोएडा से शुरू होगा, जिसे यूपी की राजनीति में ‘अशुभ’ माना जाता है।
नोएडा से ‘समानता भाईचारा रैली’ की शुरुआत
28-29 मार्च को नोएडा के दादरी से ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ और ‘PDA भागीदारी यात्रा’ की शुरुआत होगी। यह यात्रा धीरे-धीरे पूरे प्रदेश के हर जिले में पहुंचेगी। सियासी गलियारों में इसे बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कमजोर किले को फतह करने की रणनीति के तहत सपा का मानना है कि अगर नोएडा और पश्चिमी यूपी में संगठन मजबूत हो जाए तो पूरे प्रदेश का चुनावी समीकरण बदल सकता है। इस अभियान की कमान सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी को सौंपी गई है।
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‘अशुभ’ मिथक को चुनौती
उत्तर प्रदेश में दशकों से यह मान्यता रही है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाते हैं, उनकी कुर्सी खतरे में रहती है। वर्ष 2012-2017 के अपने कार्यकाल में अखिलेश यादव ने इस कारण नोएडा का दौरा नहीं किया था। हालांकि, वर्ष 2017 और 2022 में दूरी बनाए रखने के बावजूद सत्ता हासिल नहीं हो पाई। अब अखिलेश ने इस अंधविश्वास को तोड़ते हुए अभियान की शुरुआत उसी नोएडा से करने का निर्णय लिया है, जहां 2012 में उन्होंने साइकिल यात्रा से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
‘संविधान बचाओ-PDA बचाओ’ का नारा
सपा प्रमुख विशेष रथ (बस) पर पूरे प्रदेश का भ्रमण करेंगे। यात्रा का मुख्य नारा ‘संविधान बचाओ-PDA बचाओ’ होगा। जिसमें पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटर को एकजुट करने पर जोर रहेगा। लोकसभा चुनाव 2024 में मिली बड़ी सफलता के बाद सपा इसी PDA फॉर्मूले को विधानसभा स्तर पर और मजबूत करना चाहती है।
कमजोर किले को फतह करने की तैयारी
पश्चिमी यूपी और नोएडा में सपा का प्रदर्शन पिछली बार निराशाजनक रहा था। वर्ष 2022 में बीजेपी ने गौतमबुद्ध नगर की सभी सीटें अपने नाम की थी। मार्च के पहले हफ्ते में दादरी में बड़े गुर्जर सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें 142 विधानसभाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यादव वोट कम होने के कारण सपा गुर्जर, मुस्लिम और दलित गठजोड़ को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। पार्टी हर सीट पर सर्वे कर रही है और ‘SIR’ में सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।