समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज में हुए विवाद के बाद यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई सियासी चर्चा और हलचल को जन्म दे रही है।

शंकराचार्य से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव (img source: google)
Lucknow: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने गुरुवार को राजधानी Lucknow में Swami Avimukteshwaranand Saraswati से मुलाकात की। दोनों के बीच यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली, जिसे प्रदेश की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि वह शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया बहुत शक्तिशाली हो गया है और कई लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह यहां किसी विवाद के लिए नहीं बल्कि आशीर्वाद लेने आए हैं।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में Akhilesh Yadav ने कहा, “हम यहां उनका आशीर्वाद लेने आए हैं। आज के समय में सोशल मीडिया इतना ताकतवर हो गया है कि हर व्यक्ति किसी भी मुद्दे को विवाद बना सकता है, लेकिन मैं यहां सिर्फ शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने आया हूं।” बताया जा रहा है कि दोनों के बीच करीब एक घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। हालांकि बातचीत के विषयों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
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यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में Magh Mela 2026 के दौरान Prayagraj में प्रशासन और पुलिस के साथ शंकराचार्य का विवाद चर्चा में रहा था। उस घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह मुलाकात भी उसी संदर्भ में देखी जा रही है और इससे प्रदेश की राजनीति में चर्चा और तेज हो सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों का प्रभाव अक्सर चुनावी माहौल पर भी पड़ता है। ऐसे में समाजवादी पार्टी प्रमुख की यह मुलाकात राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखी जा रही है।