आगरा नाला हादसा: मिट्टी में दबकर दो मजदूरों की मौत, जांच में सामने आई निर्माण में लापरवाही 

आगरा के सिकंदरा अरतोनी में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई। एडीए की शुरुआती जांच में शटरिंग हटाने और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 23 September 2026, 3:34 PM IST
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आगरा: सिकंदरा क्षेत्र के अरतोनी में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरने से हुई दो मजदूरों की मौत के मामले में शुरुआती जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही की बात सामने आई है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि खुदाई के बाद मजदूरों ने मिट्टी रोकने के लिए लगाई गई शटरिंग की सपोर्ट रॉड हटा दी थीं, जिसके बाद मिट्टी का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया।

15 फीट गहराई में दब गए थे तीन मजदूर

सोमवार को अरतोनी क्षेत्र में नाले के निर्माण के दौरान अचानक मिट्टी की ढाय गिर गई थी। हादसे के समय तीन मजदूर करीब 15 फीट गहरी खुदाई में दब गए थे। मौके पर मौजूद लोगों ने बुलडोजर और फावड़े की मदद से करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद तीनों मजदूरों को बाहर निकाला।

हादसे में मुजफ्फरनगर निवासी 28 वर्षीय विकास और 45 वर्षीय सुशील की मौत हो गई। वहीं एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।

मजदूरों ने ठेकेदार पर उठाए थे सवाल

हादसे के बाद मजदूरों ने आरोप लगाया था कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि अगर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो हादसा टाला जा सकता था।

एडीए की शुरुआती जांच में भी निगरानी व्यवस्था और ठेकेदार व मजदूरों की कथित चूक को हादसे की वजह बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से पहले शुरू हुआ था नाला निर्माण?

इस मामले में एक और बड़ा सवाल नाले के निर्माण को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि सिकंदरा क्षेत्र में बन रहे करीब 20 फीट गहरे नाले के निर्माण में 203 पेड़ बाधा बन रहे थे। आरोप है कि पेड़ों को हटाने के लिए जरूरी अनुमति मिलने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।

पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि एडीए को पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिली थी। उनके अनुसार, वर्ष 2023 से वन विभाग की ओर से अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही थी।

203 पेड़ों के बदले लगाने थे 2030 पेड़

जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने 203 पेड़ों को हटाने के बदले 2030 नए पेड़ लगाने के लिए जगह चिह्नित की थी। इसके लिए करीब 25 लाख रुपये का एस्टीमेट भी एडीए को भेजा गया था।

वहीं एडीए के मुख्य अभियंता संजीव कुमार का कहना है कि निर्माण कार्य के लिए जरूरी मंजूरी प्राप्त कर ली गई है। पेड़ों से संबंधित अनुमति के लिए वन विभाग के माध्यम से आवेदन किया गया है और मंजूरी मिलने के बाद आगे का काम किया जाएगा।

विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार

एडीए के मुख्य अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में निगरानी और निर्माण से जुड़े लोगों की चूक की जानकारी सामने आई है। अब विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Agra

Published :  23 September 2026, 3:34 PM IST

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