गोरखपुर में साल 2017 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 8 साल की सजा सुनाई। यह फैसला ऑपरेशन कनविक्शन के तहत पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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Gorakhpur: नाबालिगों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर कानून की सख्ती एक बार फिर सामने आई है। गोरखपुर में साल 2017 में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पीड़िता को इंसाफ मिला है। विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को गोरखपुर पुलिस और न्याय व्यवस्था की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
2017 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला थाना सहजनवां क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2017 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। पीड़िता की शिकायत पर थाना सहजनवां में पॉक्सो एक्ट के तहत बलराम पुत्र परिखन निवासी भड़सार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विवेचना शुरू की और साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
साक्ष्यों के आधार पर साबित हुआ अपराध
मामले की सुनवाई एडीजे/पॉक्सो-2 न्यायालय (गोरखपुर) में चली। लंबी बहस, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के गहन परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जा सकते और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है।
ऑपरेशन कनविक्शन की बड़ी कामयाबी
यह सजा उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मिली एक अहम न्यायिक सफलता है। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर की निगरानी में इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई। थाना स्तर के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल की सतत और प्रभावी पैरवी ने केस को मजबूत बनाया और दोषी को सजा तक पहुंचाया।
विशेष लोक अभियोजक की अहम भूमिका
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक राममिलन सिंह की सशक्त और तथ्यपरक पैरवी को न्यायालय ने सराहनीय माना। उनकी कानूनी दक्षता और निरंतर प्रयासों के चलते पीड़िता को न्याय मिल सका। अदालत ने आरोपी को 8 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस का सख्त संदेश
गोरखपुर पुलिस ने इस फैसले को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में आगे भी त्वरित कार्रवाई, मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने का अभियान जारी रहेगा।