सावधान! कहीं आपके बच्चे की आँखें बिल्ली की तरह तो नहीं चमकती

देश में बच्चों की आंख में कैंसर की बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। यह बीमारी एक महीने से पांच साल तक के बच्चों में हो रही है। यह जानलेवा बीमारी है। ज्यादातर बच्चे पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों और बिहार से आए हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 9 April 2026, 3:03 PM IST

New Delhi: आजकल समाज में नई-नई बीमारियों देखने को मिल रही है। पहले यह बीमारी विकसित देशों तक ही सीमित थी। लेकिन अब भारत में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

ताजा जानकारी के अनुसार एक महीने से पांच साल तक के 20 बच्चों की आंख में कैंसर का ताजा मामला सामने आया है। बच्चों का इलाज बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में चल रहा है। 40 फीसदी बच्चों की कैंसर संक्रमित आंख निकालनी पड़ी है। 60 फीसदी की कीमोथेरेपी कराई जा रही है। जिन बच्चों को कैंसर हुआ है उनकी आंखें बिल्ली की तरह चमकती हैं।

ज्यादातर बच्चे पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों और बिहार से आए हैं। इन सबको रेटिनोब्लास्टोमा नामक जानलेवा आंख का कैंसर हुआ है। मार्च में ही तीन बच्चे इलाज कराने पहुंचे हैं। बाकी मामले 6 महीने के दौरान आए।

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जानलेवा है ये कैंसर

डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि जब रेटिना की कोशिकाएं परिपक्व होने के बजाय असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं, तो वे ट्यूमर (गांठ) का रूप ले लेती हैं। ट्यूमर आंख के भीतर ही बढ़ता रहता है। यदि इलाज न मिले, तो यह ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। यह शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे हड्डियों या लिम्फ नोड्स, तक भी फैल सकता है जो जानलेवा साबित होता है।

प्रो. मौर्य के मुताबिक, रेटिनोब्लास्टोमा मुख्य रूप से छोटे बच्चों में होने वाला दुर्लभ प्रकार का नेत्र कैंसर है। जब आंख के पिछले हिस्से यानी रेटिना की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं तब इस प्रकार की बीमारी विकसित होती है। 40 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी परिवार के जींस के कारण होती है। यदि माता-पिता में से किसी को भी कभी कैंसर हुआ हो, तो यह बच्चे को भी प्रभावित कर सकता है।

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बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरपी मौर्य ने बताया कि इन बच्चों में कैंसर की गांठें आंखों के भीतर तेजी से फैली हैं। कुछ मामलों में तो कैंसर ऑप्टिक नर्व के जरिये मस्तिष्क तक पहुंचने वाला था। बच्चों के आंखों की कीमोथेरेपी कराई गई। साथ ही माइक्रो सर्जरी के जरिये ट्यूमर निकाला गया।

बच्चों में दिखते हैं ये लक्षण

  • कम रोशनी में या कैमरे की फ्लैशलाइट पड़ने पर बच्चे की पुतली काली दिखने के बजाय सफेद, चांदी जैसी या सुनहरी चमके।
  • बच्चे की दोनों आंखों का एक दिशा में न होना। यदि बच्चा तिरछा देख रहा है, तो यह ट्यूमर के कारण दृष्टि में रुकावट के संकेत हो सकते हैं।
  • बिना किसी स्पष्ट संक्रमण या चोट के आंख का लंबे समय तक लाल रहना।
  • ट्यूमर के बढ़ने के कारण आंख का बाहर की ओर उभरना या उसमें लगातार सूजन रहना।
  • आंख की पुतली के रंग में अचानक बदलाव आना।
  • बच्चे का खिलौनों या वस्तुओं पर फोकस न कर पाना, चलते समय चीजों से टकराना या बार-बार आंखें मलना।
  • रोशनी पड़ने पर भी पुतली का सामान्य रूप से न सिकुड़ना।

Location :  New Delhi

Published :  9 April 2026, 3:03 PM IST