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Budget Session 2026 में क्या आम आदमी को राहत मिलेगी? मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ घटेगा या बढ़ेगा? स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए क्या बड़ा ऐलान संभव है? जानिए संसद सत्र, सरकार-विपक्ष की रणनीति और बजट के हर पहलू का गहन विश्लेषण।
बजट सत्र 2026
New Delhi: आगामी केंद्रीय बजट और बजट सत्र 2026 सिर्फ़ सरकार का सालाना खर्च-आय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच है। यह आम आदमी की जेब, मध्यम वर्ग की योजनाएं, युवाओं के अवसर, स्टार्टअप्स की उड़ान, निवेशकों का भरोसा और अर्थव्यवस्था की गति सब पर सीधा असर डालेगा। इसलिए इस बजट को समझना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भविष्य की समझ भी है।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने अपने चर्चित शो 'The MTA Speaks' में विश्लेषण करते हुए कहा कि इस साल संसद का बजट सत्र दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक तय है। इस दौरान लोकसभा में आम बजट पेश किया जाएगा, जिसके बाद आम चर्चा होगी। मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर बहस होगी, और सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पास कराने की कोशिश करेगी।
बजट पेश होने का दिन भारतीय राजनीति में हमेशा से बेहद अहम रहा है। यह वह दिन होता है जब संसद के भीतर सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को देश के सामने रखता है, वहीं विपक्ष इसी दिन सरकार को सबसे आक्रामक तरीके से घेरने की रणनीति पर काम करता है। पिछले कई वर्षों का अनुभव बताता है कि बजट वाले दिन संसद में राजनीतिक टकराव अपने चरम पर होता है। कभी वॉकआउट, कभी नारेबाजी, कभी तीखी बहस और कभी सदन की कार्यवाही बाधित होना ये सब बजट दिवस की पहचान बन चुके हैं। सत्ता पक्ष बजट को विकासोन्मुख, दूरदर्शी और समावेशी बताने में जुटा रहता है, जबकि विपक्ष इसे आम आदमी विरोधी, किसान विरोधी या कॉरपोरेट-परस्त करार देने की कोशिश करता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट सत्र में एक बार फिर देश के सामने केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यदि 2026 का बजट भी उनके खाते में जाता है, तो यह उनका आठवां बजट होगा। उन्होंने वर्ष 2019 में अंतरिम बजट पेश किया था और इसके बाद 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में लगातार पूर्ण बजट पेश किए। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कोविड-19 महामारी, वैश्विक आर्थिक मंदी, सप्लाई चेन में बाधा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती वैश्विक ब्याज दरों जैसे असाधारण हालातों के बीच देश का बजट पेश किया और अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश की। ऐसे में 2026 का बजट उनके लिए भी एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है, क्योंकि अब सवाल केवल संकट प्रबंधन का नहीं, बल्कि स्थायी विकास, रोजगार सृजन और आम लोगों को प्रत्यक्ष राहत देने का है।
सरकार की रणनीति इस बजट सत्र में तीन स्पष्ट स्तरों पर दिखाई दे सकती है। पहला, आर्थिक स्थिरता और विकास दर को लेकर भरोसा बनाए रखना। सरकार यह संदेश देना चाहेगी कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत स्थिति में है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। दूसरा, मिडिल क्लास और आम आदमी को कुछ ठोस संकेत देना, ताकि महंगाई, टैक्स और जीवन यापन की बढ़ती लागत को लेकर जो असंतोष है, उसे कुछ हद तक कम किया जा सके। तीसरा, युवाओं, स्टार्टअप्स और निवेशकों को यह भरोसा दिलाना कि भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए पूरी तरह तैयार है और यहां नीतिगत स्थिरता बनी रहेगी।
बजट सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों के आने की संभावना है। टैक्स सुधारों से जुड़े प्रस्ताव, डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले कानून, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग से जुड़े प्रावधान और श्रम सुधारों से संबंधित संशोधन इस सत्र का हिस्सा हो सकते हैं। सरकार लंबे समय से टैक्स प्रणाली को सरल बनाने की बात कर रही है। मिडिल क्लास की सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स स्लैब में राहत, स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी और जटिल नियमों से छुटकारे को लेकर है। हालांकि सरकार के सामने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की मजबूरी भी है। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि सरकार राहत और वित्तीय अनुशासन के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
महंगाई का मुद्दा इस बजट सत्र की बहसों का केंद्र रहने वाला है। खाद्य पदार्थों की कीमतें, ईंधन का खर्च, बिजली के बिल और रोजमर्रा की जरूरतों का बढ़ता बोझ आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। विपक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि वह महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। पिछले वर्षों में भी हमने देखा है कि बजट पेश होने के दिन विपक्ष ने किसानों की आय, गैस सिलेंडर की कीमत, पेट्रोल-डीजल के दाम और युवाओं की नौकरियों को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए। कई बार विपक्षी सांसदों ने सदन में तख्तियां दिखाईं, नारे लगाए और कार्यवाही बाधित की। इसके जवाब में सरकार ने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति करने और विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोप लगाए।
मिडिल क्लास के लिए बजट सत्र हमेशा उम्मीदों और आशंकाओं का मिश्रण होता है। टैक्स में थोड़ी सी राहत, हाउसिंग लोन पर ब्याज में छूट, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने जैसे कदम सीधे तौर पर करोड़ों परिवारों को प्रभावित करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर खर्च किया है, लेकिन मिडिल क्लास यह जानना चाहता है कि उसके घरेलू बजट में सीधी राहत कब मिलेगी। इस बार सरकार अगर मिडिल क्लास को लेकर कोई ठोस संदेश देती है, तो इसका राजनीतिक असर भी साफ दिखाई दे सकता है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बजट सत्र 2026 बेहद निर्णायक माना जा रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब्स में शामिल हो चुका है, लेकिन पिछले कुछ समय से फंडिंग में गिरावट, टैक्स विवाद और रेगुलेटरी जटिलताएं इस सेक्टर की बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। एंजेल टैक्स को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है और स्टार्टअप्स लगातार इसकी पूरी तरह समाप्ति की मांग करते रहे हैं। सरकार ने पिछले वर्षों में कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन इस बार उम्मीद की जा रही है कि स्टार्टअप्स के लिए अधिक स्पष्ट, स्थिर और भरोसेमंद नीतियां सामने आएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, फिनटेक, हेल्थटेक और डीप टेक जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस संभव है।
रोजगार का सवाल इस बजट सत्र का सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली मुद्दा है। युवा आबादी वाले देश में नौकरियों की कमी विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हथियार बनी हुई है। पिछले बजटों में सरकार ने स्किल डेवलपमेंट, एमएसएमई सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की बात की, लेकिन विपक्ष का आरोप रहा है कि जमीनी स्तर पर हालात उतने बेहतर नहीं हैं। इस बार बजट में रोजगार सृजन, अप्रेंटिसशिप, स्किल ट्रेनिंग और निजी क्षेत्र में नौकरियों को बढ़ावा देने से जुड़े प्रावधानों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो सत्ता पक्ष इस बजट सत्र का इस्तेमाल अपनी उपलब्धियों को गिनाने और भविष्य की योजनाओं को मजबूती से रखने के लिए करेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और सामाजिक कल्याण योजनाएं सरकार के मुख्य हथियार होंगे। वहीं विपक्ष इस बात पर जोर देगा कि विकास के आंकड़ों के पीछे आम आदमी की परेशानियां छिपाई जा रही हैं। संसद के भीतर होने वाली बहसें इसी टकराव को और तीखा बनाएंगी।
आम नागरिक के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि बजट सत्र के फैसले उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित करेंगे। टैक्स स्लैब में बदलाव, सब्सिडी, शिक्षा-स्वास्थ्य पर खर्च, ईंधन की कीमतें और ब्याज दरें ये सभी सीधे तौर पर घर के बजट से जुड़े हुए हैं। इसलिए बजट को केवल बड़ी घोषणाओं के नजरिये से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रावधानों के वास्तविक असर के नजरिये से देखना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वित्तीय बाजारों की नजर भी इस बजट पर टिकी है। सरकार अगर स्थिर टैक्स नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर निरंतर खर्च और सुधारों का स्पष्ट रोडमैप पेश करती है, तो इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं किसी भी तरह की नीतिगत अनिश्चितता या अप्रत्याशित फैसले बाजारों पर तत्काल असर डाल सकते हैं।
अंततः बजट सत्र 2026 एक ऐसा पड़ाव है जहां सरकार, विपक्ष और जनता तीनों की अपेक्षाएं आमने-सामने खड़ी हैं। यह सत्र तय करेगा कि आम आदमी को कितनी राहत मिलती है, मिडिल क्लास को टैक्स के बोझ से कितनी निजात मिलती है और स्टार्टअप्स व युवाओं को आगे बढ़ने के लिए कितना मजबूत आधार मिलता है। आने वाले दिनों में संसद में होने वाली हर बहस, हर संशोधन और हर फैसला देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।