
यूपी में मोबाइल टावर स्कैम का बढ़ा आतंक (Img- Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश के शहरों से लेकर कस्बों और गांवों तक इन दिनों मोबाइल टावर लगवाने का क्रेज तेजी से बढ़ा है। जैसे-जैसे टेलीकॉम कंपनियां अपना नेटवर्क मजबूत कर रही हैं, वैसे-वैसे यूपी के लोग अपनी खाली जमीन, खेतों या मकान की छतों को किराए पर देने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं। ले
किन, आपकी इसी उत्सुकता का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक जाल बुन लिया है। हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से मोबाइल टावर लगाने के नाम पर धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद सरकारी एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी किया है।
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने हाल ही में देश सहित उत्तर प्रदेश में सक्रिय इस नए फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है। इस स्कैम में जालसाज बकायदा सरकारी विभागों के नाम पर तैयार की गई फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) सीधे लोगों के व्हाट्सएप या ईमेल पर भेज रहे हैं।
इसके बाद वे भोले-भाले नागरिकों से टावर लगाने का एग्रीमेंट करने के नाम पर मोटी फीस ऐंठ रहे हैं। अधिकारियों ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर घूम रहे ये डॉक्यूमेंट्स पूरी तरह से फर्जी हैं और लोगों को इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
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यह धोखाधड़ी बेहद शातिराना अंदाज में शुरू होती है। स्कैमर्स खुद को बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के बड़े अधिकारी बताकर यूपी के लोगों से संपर्क करते हैं। वे पीड़ित को झांसा देते हैं कि उनकी जमीन या छत पर टावर लगाने के बदले उन्हें हर महीने भारी-भरकम किराया और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी।
जब मकान या जमीन मालिक उनके झांसे में आ जाता है और उनका भरोसा जीत लिया जाता है, तब असली खेल शुरू होता है। स्कैमर्स एक नकली एनओसी थमाते हैं और एग्रीमेंट फीस, सर्वे फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर शुरुआती 2,500 रुपये भेजने को कहते हैं।
यूपी के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग अक्सर इस छोटी रकम को देने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। जैसे ही पीड़ित यह राशि ट्रांसफर करता है, जालसाज या तो अपना फोन बंद कर लेते हैं या फिर किसी अन्य टैक्स का बहाना बनाकर और पैसों की मांग करने लगते हैं।
बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती, कुछ डिजिटल ठग टावर एग्रीमेंट के कागजात तैयार करने और बैंक में रेंट ट्रांसफर करने के बहाने पीड़ितों से उनकी बैंकिंग और पर्सनल डिटेल्स मांग लेते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा करता है, उसका पूरा बैंक खाता पलक झपकते ही साफ हो जाता है।
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इस बड़े खतरे को देखते हुए प्रशासन और साइबर सेल ने यूपी के नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है। हमेशा याद रखें कि कोई भी असली टेलीकॉम कंपनी कभी भी अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी के मालिकों से टावर लगाने की मंजूरी के लिए किसी भी तरह की एडवांस फीस या एग्रीमेंट चार्ज नहीं मांगती है।
अगर आपके पास ऐसा कोई ऑफर आता है, तो किसी भी अज्ञात व्यक्ति पर भरोसा करने के बजाय सीधे उस टेलीकॉम कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या उनके रजिस्टर्ड कस्टमर केयर नंबर पर बात करके सच्चाई का पता लगाएं। किसी भी अनजान दस्तावेज में स्पेलिंग, अजीब लेआउट और व्याकरण की गलतियों को ध्यान से पकड़ें, क्योंकि फ्रॉड पेपर्स में अक्सर ऐसी कमियां होती हैं।
Location : Luckknow
Published : 1 July 2026, 1:03 PM IST
Topics : banking scam cyber crime Online Fraud tech news