Tech News: WhatsApp का बड़ा फैसला, 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए आया नया फीचर… जानिए फायदे और खतरे

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने नया पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट फीचर शुरू किया है, जिससे अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी ऐप इस्तेमाल कर सकेंगे और माता-पिता अपने डिवाइस से बच्चों के अकाउंट को मॉनिटर कर पाएंगे।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 16 March 2026, 3:55 PM IST

New Delhi: दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में शामिल व्हाट्सएप ने हाल ही में एक नया फीचर रोल-आउट किया है, जिसके तहत अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट के जरिए ऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस फीचर में माता-पिता अपने बच्चों के अकाउंट को अपने स्मार्टफोन से लिंक कर सकेंगे, जिससे उन्हें बच्चों की चैट और गतिविधियों पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कई देशों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्ती की जा रही है। ऐसे में यह फीचर बहस का विषय बन गया है कि क्या छोटे बच्चों को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने देना सही फैसला है।

टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैरेंटल कंट्रोल बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर रखने के बजाय उन्हें सुरक्षित तरीके से तकनीक का इस्तेमाल सिखाने का एक माध्यम बन सकता है। हालांकि यह भी सच है कि सिर्फ तकनीकी नियंत्रण ही पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता।

एनक्रिप्शन और स्कैम का खतरा

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि व्हाट्सएप समेत कई प्लेटफॉर्म पर चैट एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के साथ होती है। इसका मतलब है कि चैट के कंटेंट को किसी तीसरे व्यक्ति के लिए देख पाना लगभग असंभव होता है। ऐसे में यह जानना मुश्किल हो जाता है कि बच्चा किससे बातचीत कर रहा है।

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आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि स्कैमर्स अक्सर फेक प्रोफाइल बनाकर बच्चों को टारगेट करते हैं। वे पहले पब्लिक ग्रुप में बच्चों से दोस्ती करने की कोशिश करते हैं और फिर निजी चैट में बातचीत शुरू कर देते हैं। कई बार वे इनाम या गेमिंग रिवॉर्ड का लालच देकर बच्चों से OTP या निजी जानकारी मांगते हैं।

यह समस्या सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं है। ऐसे साइबर स्कैम तेजी से स्नैपचैट, डिस्कॉर्ड और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी फैल रहे हैं। इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही ऑनलाइन सुरक्षा के नियम सिखाने पर जोर देते हैं।

बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर असर

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक कम उम्र में मैसेजिंग ऐप्स का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास को प्रभावित कर सकता है। PSRI अस्पताल की साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर अर्पिता कोहली के अनुसार, अगर बच्चे डिजिटल बातचीत पर ज्यादा निर्भर हो जाएं तो उनका आमने-सामने संवाद कम हो सकता है।

बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर असर (Image source: Google)

इससे बच्चों में भावनाओं को समझने, सही तरीके से संवाद करने और सामाजिक रिश्ते बनाने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। हालांकि पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह बच्चों को जिम्मेदारी के साथ डिजिटल दुनिया से परिचित कराने का एक सुरक्षित तरीका भी बन सकता है।

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विशेषज्ञ माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे तकनीकी नियंत्रण के साथ-साथ बच्चों से खुलकर बातचीत भी करें। स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा तय करना, मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करना और जरूरत पड़ने पर Google Family Link या Apple Family Sharing जैसे टूल्स का उपयोग करना बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

ऐसा माve जा रहा है कि अगर माता-पिता सतर्क रहें और बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के नियम समझाएं, तो तकनीक उनके विकास के लिए खतरा नहीं बल्कि सीखने का एक सुरक्षित माध्यम बन सकती है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 16 March 2026, 3:55 PM IST