Meta में 8000 नौकरियां खत्म! AI के लिए मार्क जुकरबर्ग का सबसे बड़ा दांव, कर्मचारियों में डर

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta अब ऐसा बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिसने हजारों कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी AI पर रिकॉर्ड खर्च कर रही है और इसके बीच अचानक हजारों लोगों की नौकरी जाने की खबर ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 12 May 2026, 3:54 PM IST
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New Delhi: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पेरेंट कंपनी Meta 20 मई को करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है।

कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग अब Meta को छोटे लेकिन ज्यादा प्रभावी और AI-संचालित ढांचे में बदलना चाहते हैं। हाल ही में कंपनी के तिमाही नतीजों के दौरान उन्होंने साफ संकेत दिए कि Meta अब उन्हीं कर्मचारियों को प्राथमिकता देगी, जो कम संसाधनों में बड़े प्रोजेक्ट्स संभाल सकें।

AI बदल रहा है काम करने का तरीका

मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि AI टूल्स ने टेक कंपनियों के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। उनका कहना है कि जिन कामों को पहले दर्जनों इंजीनियर कई महीनों में पूरा करते थे, अब वही काम एक या दो लोग कुछ दिनों में कर सकते हैं।

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इसी सोच के तहत कंपनी अब “अल्ट्राफ्लैट” स्ट्रक्चर लागू कर रही है। इसका मतलब है कि टीमों में मैनेजमेंट लेयर कम होगी और अधिकतर फैसले सीधे इंजीनियरिंग स्तर पर लिए जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब Meta में लगभग 50 इंजीनियरों पर केवल एक मैनेजर काम करेगा। कंपनी का मानना है कि इससे फैसले तेजी से होंगे और उत्पादकता बढ़ेगी। हालांकि कर्मचारियों के बीच इसे लेकर चिंता भी बढ़ रही है।

रिकॉर्ड निवेश के बीच बढ़ा दबाव

Meta इस समय AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड स्तर का निवेश कर रही है। कंपनी इस साल डेटा सेंटर, कस्टम AI चिप्स और बड़े AI मॉडल्स की ट्रेनिंग पर 125 से 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की तैयारी में है। कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी सुसान ली ने माना कि पिछले साल की तुलना में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च लगभग दोगुना हो गया है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन और ऑपरेशनल बजट के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन गया है।

इसी वजह से कंपनी ने लागत कम करने और संसाधनों को AI प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ने के लिए बड़े स्तर पर छंटनी का फैसला लिया है।

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शेयर बाजार में भी दिखी चिंता

Meta के भारी खर्च और भविष्य की रणनीति को लेकर निवेशकों में भी चिंता बढ़ी है। कंपनी की अर्निंग कॉल के बाद Meta के शेयरों में करीब 6 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि AI पर इतना बड़ा निवेश भविष्य में कंपनी को कितना फायदा पहुंचाएगा। हालांकि Meta का दावा है कि यह निवेश आने वाले वर्षों में कंपनी की सबसे बड़ी ताकत साबित होगा।

कर्मचारियों की निगरानी से बढ़ी बेचैनी

Meta ने कंपनी के अंदर “मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव” नाम का एक नया ट्रैकिंग सिस्टम भी शुरू किया है। बताया जा रहा है कि यह सिस्टम कर्मचारियों की गतिविधियों जैसे कीस्ट्रोक्स, क्लिक और माउस मूवमेंट तक रिकॉर्ड करता है।
कंपनी AI की मदद से कर्मचारियों के प्रदर्शन का विश्लेषण भी कर रही है। इन बदलावों के बाद कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ा है और कई कर्मचारी भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।

Location :  New Delhi

Published :  12 May 2026, 3:54 PM IST

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