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देहरादून: उत्तराखंड के चमोली में पिछले रविवार को ग्लेशियर फटने से मची तबाही के बाद से लापता लोगों की तलाश में सर्च अभियान जारी है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ते जा रहे हैं, लापता लोगों के जीवित मिलने की उम्मीदें भी लगातार कम होती जा रही है। हादसे के बाद से 204 लोग लापता हैं, जिनमें से 58 शव बरामद किये जा चुके हैं। लेकिन इन 58 शवों में से भी कई शवों की पहचान नहीं हो सकी है। अब तक केवल 31 मृतकों की ही पहचान हो चुकी है। तपोवन टनल समेत ऋषिगंगा परियोजना, अलकनंदा नदी समेत आस-पास के क्षेत्रों में कई टीमों द्वारा लापता लोगों को ढूंढने का काम किया जा रहा है।

मंगलवार को चमोली की जिलाधिकारी चमोली जिलाधिकारी स्वाती भदौरिया ने आपदा के बाद से जारी राहत एवं बचाव कार्यों का फिर एक बार जायजा लिया। उन्होंने उन चार स्थानों का भी जायजा लिया, जहां सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सर्च ऑपरेशन के लिए अधिकारियों को कई जरूरी निर्देश भी दिए। इसके बाद जिलाधिकारी ने लापता लोगों के परिजनों से भी मुलाकात की।

मंगलवार को डीआईजी एसडीआरएफ रिद्धीम अग्रवाल ने बताया अब तक बरामद किये गये कुल 58 शवों में से 31 मृतकों की पहचान हो चुकी है। तपोवन सुरंग से मिले 11 शवों की पहचान की जा चुकी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के साथ डॉग स्क्वॉयड रैणी गांव, तपोवन और आसपास के इलाकों में लापता लोगों की खोज जारी हैं।

लापता लोगों को लेकर यह भी आशंका जताई जा रही है कि ग्लेशियर फटने से मची तबाही के बाद कुछ लोग मलबे के साथ नदी में बह सकते हैं। इस आशंका के मद्देजनर भी अलकनंदा नदी के दोनों तरफ खोज की जा रही है। एनडीआरएफ टीम ने मंगलवार को विष्णुप्रयाग में अलकनंदा नदी पर सर्च ऑपरेशन चलाया।

मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे तपोवन सुरंग के अंदर मलबा हटाने के दौरान अचानक पानी आना शुरू हो गया। जिसके बाद राहत बचाव कार्य रोक दिया गया है। सुरंग से पानी की निकासी के लिए पंप लगाया लगाया। सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया है। मलबे और पानी के कारण सर्च ऑपरेशन में बाधाएं आने की खबरें है।
Published : 16 February 2021, 3:44 PM IST
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