उत्तर प्रदेश: 10 फीसद सवर्ण आरक्षण लागू करने वाला यूपी बना चौथा राज्य, योगी सरकार ने दी मंजूरी

डीएन ब्यूरो

गुजरात, झारखंड और उत्तराखंड के बाद अब यूपी सरकार ने भी 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने 14 महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं। डाइनामाइट न्यूज की रिपोर्ट में जानिए पूरी डिटेल..

योगी सरकार ने कैबिनेट में लिया 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण  लागू करने का फैसला
योगी सरकार ने कैबिनेट में लिया 10 प्रतिशत सवर्ण आरक्षण लागू करने का फैसला

उत्तर प्रदेश: गुजरात, झारखंड और उत्तराखंड के बाद अब यूपी में भी 10 फीसद गरीब सवर्ण आरक्षण को मंजूरी दे दी गई हैं। आपको बता दें कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद गुजरात ने सबसे पहले अपने राज्य में इसे लागू किया था। इसके बाद झारखंड और उत्तराखंड में भी इसे लागू किया गया और अब यूपी में भी सवर्ण गरीबों को 10 फीसद आरक्षण के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी गई है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक में सवर्ण आरक्षण समेत कुल 14 महत्वपूर्ण फ़ैसले किए गए।

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सवर्ण आरक्षण लागू करने वाला उत्तर प्रदेश बना चौथा राज्य
गरीब सवर्णों को शैक्षणिक संस्थानों और नौकरी में 10 फीसद आरक्षण देने वाले कानून को सबसे पहले गुजरात सरकार ने लागू किया था। उसके बाद झारखंड और उत्तराखंड में भी इसे लागू किया गया। अब गरीब सवर्ण आरक्षण लागू करने वाला उत्तर प्रदेश चौथा राज्य बन गया है।
इसके लिए अध्यादेश के मसोदे को भी मंजूरी दी जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार और गुजरात सरकार के आरक्षण फार्मूले का अध्ययन करने का फैसला किया है। अध्ययन के बाद आरक्षण को लागू करने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा।

सवर्ण आरक्षण समेत लिए गए 14 महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट में गरीब सवर्णों के 10 फीसद आरक्षण के अलावा भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। योगी सरकार ने फैसला लिया है कि एक जिला एक उत्पाद योजना में मार्केटिंग और ढुलाई के लिए सहायता मिलेगी। मुगलसराय तहसील का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर होगा। आबकारी विभाग में अतिरिक्त आमदनी पर लगे कर से क़रीब 165 करोड़ रुपए निराश्रित गोवंश के मद में होगा उपभोग, फेल हो चुके 110 नलकूप को ठीक किया जाएगा जबकि 2000 नए नलकूप लगाए जाएंगे, मंत्रियों को एक करोड़ रुपये तक की परियोजना के लिए कैबिनेट के अनुमोदन की ज़रूरत नहीं होगी, आदि महत्वपूर्ण फैसले लिए गएं। 

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 जनवरी को लगाई थी मुहर 

आपको बता दें कि सवर्ण वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 जनवरी को मुहर लगाई थी। इसके बाद आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए 8 जनवरी को लोकसभा में संविधान का 124वां संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया था।

लंबी बहस के बाद इसे लोकसभा में मंजूरी मिल गई। अगले दिन राज्यसभा में भी मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति कोविंद के पास भेजा गया, जहां राष्ट्रपति कोविंद ने भी बिल पर हस्ताक्षर कर इसे अपनी मंजूरी दे दी। यह आरक्षण अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों को मिलने वाले 49.5 फीसदी आरक्षण से अलग रखा गया है।
  

 

 
 

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