शिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष: मंदिर-मस्जिद मामला आपसी बातचीत से हो हल

डीएन संवाददाता

अयोध्या मामले के एक पक्षकार शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट से वह अयोध्या केस जीत जाते हैं तो वह चाहेंगे कि मस्जिद अयोध्या से दूर किसी मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बनाई जाए।


लखनऊ: सूबे में सरकार बदलने के बाद भगवा रंग का असर कई जगह देखने को मिल रहा है। आज शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजॉ़वी ने अयोध्या मामले का समाधान आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रस्ताव सभी पक्षों को दिया है।

लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया की सन 1944 के पहले तक अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद पर शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड का कब्जा था। मगर बाद में सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने कोर्ट में मस्जिद की ओर से खुद को दावेदार घोषित किया। उन्होनें बताया कि इस्लाम में यह मान्यता है कि जो मस्जिद बनवाता है, वह उस फिरके की ही मस्जिद मानी जाती है।

मस्जिद पर शिया समुदाय का अधिकार

शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया की अयोध्या में बाबरी मस्जिद बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बनवाई थी और वह शिया समुदाय से था इसीलिए बाबरी मस्जिद पर शिया समुदाय का ही अधिकार है।

बाबर और मीर बाकी को बताया विदेशी लुटेरा

वसीम रिजवी ने कहा की बाबर और उसका सेनापति दोनों विदेशी थे और भारत को लूटने आये थे। रिजवी ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपना जबाब दाख़िल कर दिया है। उन्होंने कहा की यदि सुप्रीम कोर्ट से वह अयोध्या केस जीत जाते हैं तो वह चाहेंगे कि मस्जिद अयोध्या से दूर किसी मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बनाई जाए। इस मामलें में पत्रकारों के पूछे गए एक सवाल के जबाव में उन्होने इस बात से इंकार किया की वह भाजपा सरकार के दबाब में ऐसा बयान दे रहे हैं।

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जारी किया फतवा

रिजवी ने कहा की इस पूरे मामलें में उन्होंने ईरान और ईराक के अयातुल्लाओं से उनकी सलाह भी मांगी थी। जिसमें से 2 अयातुल्लाओं के जबाब आ गये हैं। जिसमें उन्होंने फतवा देते हुए बताया है कि पूरे मामले का निस्तारण मित्रतापूर्ण माहौल में हिन्दू और मुसलमानो के बीच होना चाहिए। साथ ही दूसरे फतवे मे बताया गया है कि मस्जिद को राम मंदिर से दूर कहीं और बनाया जाए। अयोध्या विवाद मामलें में सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के दावे को किया खारीज।

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)






संबंधित समाचार