DN Exclusive: सरकार ने नही बनाया सीबीआई निदेशक तो बौखला उठे वरिष्ठ आईपीएस जावीद अहमद..

मनोज टिबड़ेवाल आकाश

सीबीआई निदेशक का चयन भले ही केन्द्र सरकार ने कर दिया हो लेकिन विवाद अभी भी जारी है। इस बार गंभीर नाराजगी जतायी है पैनल में शामिल होने के बावजूद सीबीआई निदेशक न बन पाने वाले यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस जावीद अहमद ने। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

आईपीएस एस. जावीद अहमद (कुर्सी पर बैठे हुए)
आईपीएस एस. जावीद अहमद (कुर्सी पर बैठे हुए)

नई दिल्ली: यूपी कैडर के आईपीएस अफसरों की अजब लीला है। हर पद इन्हीं को चाहिये नही मिलेगा तो फिर हैरान कर देने वाले सवाल खड़े कर अपने-आप को पीड़ित दिखाने की नाकाम कोशिश करेंगे। कुछ ऐसा ही किया है यूपी कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी और मूल रुप से बिहार के रहने वाले एस. जावीद अहमद ने। 

पीएम नरेन्द्र मोदी, नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के कमेटी की दो दौर की मीटिंग के बाद शनिवार को सीबीआई निदेशक के पद पर मध्य प्रदेश कैडर के 1983 बैच के वरिष्ठ आईपीएस ऋृषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति की गयी। 

जब यह खबर शाम को सामने आय़ी तो पैनल में शामिल शुक्ला से एक बैच जूनियर अफसर जावीद अहमद की नाराजगी सामने आ गयी।

डाइनामाइट न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ में कुछ लोगों ने “IPS Officer” नाम से एक WhatsApp ग्रुप बना रखा है। इसमें ज्यादातर यूपी कैडर के आईपीएस शामिल हैं। इस ग्रुप में यह सूचना शेयर की गयी कि ऋृषि कुमार शुक्ला को सीबीआई का अगला निदेशक नियुक्त किया गया है। 

इसके बाद शाम 07 बजकर 02 मिनट पर जावीद अहमद ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए लिखा कि “Allah ki marzi. Bura to lagta hai par M hona gunah hai”

अहमद के इस रिएक्शन के बाद हड़कंप मच गया। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर यह स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। चारों ओर सवाल उठने लगे कि सीबीआई में लंबा वक्त बीता चुके जावीद “M” की आड़ में अपने आप को असहाय क्यों दिखाना चाहते हैं?

इसी समाज के बीच में अलग-अलग सरकारों ने इन्हें तमाम अहम पदों पर बैठाया। यहां तक कि देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में पुलिस महकमे की सबसे बड़ी कुर्सी डीजीपी के पद पर भी बैठाया फिर भी इनके पद की लालसा समाप्त होने की नाम ही नही ले रही। आखिर क्यों? 

जावीद अहमद के रिएक्शन का वायरल स्क्रीनशॉट
जावीद अहमद के रिएक्शन का वायरल स्क्रीनशॉट

बड़ा सवाल ये है कि आखिर “M” से जावीद की मंशा क्या है? जब इस सवाल पर कुछ सीनियर अफसरों और जानकारों से बात की गयी तो इन अफसरों ने भी इस पर हैरानी जतायी और कहा कि  “M” से इनकी मंशा मुसलमान या माइनॉरिटी की आड़ लेने की है। इन अफसरों ने हैरानी जतायी कि अपने कार्यकाल में ज्यादातार समय प्राइम पोस्टिंग में गुजारने वाले जावीद ने आखिर  “M” की आड़ क्यों ली? क्या सारे पद इन्हीं को दे दिये जायें?

डाइनामाइट न्यूज़ ने इस सवाल पर जब जावीद अहमद से उनका पक्ष पूछा कि आखिर “M” की आड़ लेने का उनका उद्देश्य क्या है? इस पर उन्होंने कहा “पता नही मैं तो नहीं जानता हूं इसके बारे में” जब उन्हें उनके नंबर …….786 के बारे में पूछा गया कि ये तो आपके नंबर और नाम Javeed Ahmad के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है तो उनका जवाब था “पता नहीं ये सब क्या है आजकल तो लोग क्लोनिंग करते हैं, मुझे नही मालूम इस बारे में” आखिर में उन्होंने यह कहा कि “I have nothing to say”

देश के कई अहम पदों पर रह चुके इन अनुभवी अफसरों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अखिल भारतीय सेवा में रहते हुए सार्वजनिक तौर पर धर्म-जाति-क्षेत्र की आड़ में इस तरह की ओझी हरकत करता है तो उस पर All India service conduct rules 1968 के तहत कार्रवाई हो सकती है। 

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)











आपकी राय

#DNPoll क्या आपको लगता है जनता के असली मुद्दों को लेकर मोदी और राहुल के बीच आमने-सामने की डिबेट होनी चाहिये?

हां
80.95%
नहीं
19.05%