
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 26 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया है, जो कि भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक कदम है।
डाइनामाइट न्यूज संवादाता के अनुसार, ट्रंप ने यह भी कहा कि यह कदम न सिर्फ भारत, बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी प्रभावी होगा, क्योंकि वे भी इस तरह के टैरिफ से प्रभावित होंगे। हालांकि, यह फैसला भारत के लिए आपदा से कहीं अधिक एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है, यदि इसे सही तरीके से संभाला जाए। आइए जानते हैं कि इस पारस्परिक टैरिफ का भारत पर क्या असर पड़ेगा और इसके साथ जुड़ी प्रमुख बातें।
क्या है टैरिफ?
टैरिफ एक प्रकार का टैक्स है जिसे वस्तुओं के आयात पर लगाया जाता है और इसे आयात शुल्क भी कहा जाता है। जब कोई देश किसी अन्य देश से सामान आयात करता है, तो उसे यह टैक्स उस सरकार को चुकाना होता है। कंपनियां आम तौर पर इस शुल्क को अपने ग्राहकों पर डाल देती हैं। जिसका प्रभाव वस्तु की कीमत पर पड़ता है।
क्या है पारस्परिक टैरिफ?
पारस्परिक टैरिफ का मतलब है कि जब एक देश किसी अन्य देश पर आयात शुल्क लगाता है, तो वह भी अपने देश के उत्पादों पर उतना ही शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने अपने कई बयान में कहा था कि वह ऐसे देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे जितना कि वे अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर लगाते हैं। यही वजह है कि अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है।
अमेरिका भारत पर कितना टैरिफ लगाता है?
अमेरिका पहले से ही भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर टैरिफ लगाता है। जैसे स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल्स पर पहले से ही 25 प्रतिशत टैरिफ लागू है। इसके अलावा, 5 से 8 अप्रैल के बीच अन्य उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा, और 9 अप्रैल से भारत के उत्पादों पर यह 26 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। इस टैरिफ नीति का असर 60 से अधिक देशों पर पड़ेगा, जिनमें भारत भी शामिल है।
अमेरिका ने क्यों किया है टैरिफ का एलान?
अमेरिका का यह कदम अपने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अमेरिका को कई देशों के साथ व्यापार असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है और खासतौर पर चीन के साथ उसका व्यापार घाटा बहुत अधिक है। अमेरिका का कहना है कि इन टैरिफ से घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। 2023-24 में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 35.31 अरब डॉलर रहा था। जिसे ट्रंप प्रशासन ने इस नीति के जरिए घटाने का प्रयास किया है।
किन सेक्टर्स को टैरिफ से छूट मिली है?
कुछ आवश्यक और रणनीतिक वस्तुओं को इस टैरिफ से छूट दी गई है। इनमें फार्मास्युटिकल्स, सेमीकंडक्टर, तांबा और ऊर्जा उत्पाद जैसे तेल, गैस, कोयला और एलएनजी शामिल हैं। यह कदम अमेरिका के घरेलू उद्योग को भी ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि उन क्षेत्रों को प्रभावित न किया जा सके, जो अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
टैरिफ का भारत पर क्या असर होगा?
भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वे अमेरिका द्वारा लगाए गए 27 प्रतिशत टैरिफ के प्रभाव का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। हालांकि, प्रारंभिक आकलन यह बताता है कि इसका असर भारत के लिए कोई बड़ा झटका नहीं होगा। कुछ क्षेत्रों में जैसे फार्मास्युटिकल्स और आईटी सेवाओं में भारत के पास पहले से प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है और इन क्षेत्रों पर इसका उतना असर नहीं पड़ेगा।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर क्या चल रहा है?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर बातचीत जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में अमेरिका का दौरा किया था, और दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी। इस व्यापार समझौते के पहले चरण को सितंबर-अक्टूबर 2025 तक अंतिम रूप देने की योजना है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बावजूद भारत के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
क्या है व्यापार समझौता?
व्यापार समझौता दो देशों के बीच होता है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे से आयात और निर्यात शुल्क में बड़ी छूट देने का वादा करते हैं। इसके अलावा, वे सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नियमों को सरल बनाते हैं। यह समझौता भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है और लंबे समय में दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
क्या अमेरिका के टैरिफ डब्ल्यूटीओ के नियमों के हिसाब से हैं?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत दास का मानना है कि यह टैरिफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन करते हैं। डब्ल्यूटीओ के तहत सदस्य देशों को यह अधिकार है कि वे इन टैरिफ के खिलाफ अपील करें। ऐसे में भारत को डब्ल्यूटीओ के मंच का इस्तेमाल करके अमेरिका के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प भी मिल सकता है।
Published : 4 April 2025, 4:59 PM IST
Topics : America tax Donald Trump Donald Trump tariff Dynamite News Hindi News India Latest News tax Trump Tariff US President Donald Trump