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नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक लड़की का यौन शोषण करने और उसे गर्भवती करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने से इनकार करते हुए बुधवार को कहा कि ऐसी चिंताजनक स्थिति बन गयी है जहां किसी महिला से दुष्कर्म का आरोपी केवल आपराधिक आरोपों से बचने के लिए पीड़िता से शादी कर लेता है और मुकदमा खत्म होने के बाद उसे छोड़ देता है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘चौंकाने वाली बात है कि ऐसे अनेक मामले सामने आये हैं जिनमें आरोपी छल-कपट से और विशेष रूप से ऐसे मामलों में जब यौन उत्पीड़न के बाद पीड़िता गर्भवती हो जाती है तो महिला से शादी कर लेता है और प्राथमिकी रद्द होने के बाद उसे छोड़ देता है।’’
अदालत एक मामले में सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपी एक मुस्लिम व्यक्ति है जिसने कथित तौर पर समुदाय की ही एक नाबालिग लड़की के साथ यौन संबंध बनाये और पॉक्सो कानून तथा आईपीसी के अन्य प्रावधानों से बचने के लिए मुस्लिम पर्सनल कानून का हवाला दिया।
Published : 6 July 2023, 11:23 AM IST
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