नवरात्रि विशेषः जानें 9 प्रमुख शक्तिपीठ के बारे में.. जहां मां भक्तों पर बरसाती हैं विशेष कृपा

डीएन ब्यूरो

भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर मां सती के शरीर के हिस्से देश के जिन 52 जगहों पर गिरे, उन्हीं को ही शक्तिपीठ माना गया। डाइनामाइट न्यूज़ की नवरात्रि विशेष रिपोर्ट में जानिये देश के प्रमुख 9 शक्तिपीठों में के बारे में.. यहां नवरात्रों में क्यों लगता है भक्तों का तांता और मां कैसे बरसाती हैं कृपा..

देशभर में मां सती के प्रमुख शक्तिपीठ (फाइल फोटो)
देशभर में मां सती के प्रमुख शक्तिपीठ (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः नवरात्रि को शक्ति उपासना का त्यौहार माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि जो भी भक्त नवरात्रि में शक्तिपीठों में जाकर पूजा-अर्चना करता है उसे सारी सिद्धियां प्राप्त होती है। नवरात्रि विशेष में डाइनामाइट न्यूज़ आपको करा रहा है देश के 52 में से प्रमुख 9 शक्तिपीठों की यात्रा और दर्शन..   

 

 

शक्ति पीठों का महत्व  

पौराणिक मान्यता के अनुसार सती देवी के शरीर के विभिन्न अंगों से 52 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था। माता सती के पिता दक्ष प्रजापति द्वारा सभी देवताओं को निमंत्रण देकर और भगवान शिव को यज्ञ में न बुलाए जाने से नाराज सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपने प्राण दे दिए थे। जब भगवान शिव को इसका पता चला तो उनको इतना गुस्सा आया कि उनका तीसरा नेत्र खुल गया और शिवजी के आदेश पर उनके गणों के उग्र कोप से डरकर सारे देवता व ऋषिगण यज्ञस्थल से भाग गए।     

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मान्यता के अनुसार तब भगवान शिव ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल अपने कंधे में उठाया और दुखी होकर इधर-उधर घूमने लगे। तब शिवजी को ऐसा करते देख व संपूर्ण विश्व में प्रलय की आशंका से विचलित होकर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को काट दिया। तब देवी सती के शरीर के टुकडे़ जिन 52 जगहों पर गिरे, इन्हीं को शक्तिपीठ कहा गया। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए हैं। जो भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।

भारत के नौ प्रमुख शक्तिपीठ जहां नवरात्रि में लगता है भक्तों का तांता    

हिमाचल प्रदेश में नैना देवी और मां ब्रजेश्वरी देवी शक्तिपीठ (फाइल फोटो)

1. कालीघाट मंदिरः भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र ने जब मां सती को छिन-भिन किया तो उनके शरीर के अंग और आभुषण जगह- जगह गिरे। इनमें से कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर बहुत प्रसिद्ध है कहा जाता है कि यहां पर सती मां के पांव की चार अंगुलियां गिरी थी। यह प्रमुख शक्तिपीठों पीठों में से एक है।

2. महालक्ष्मी मंदिरः महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित यह विभिन्न शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां पर मां सती का त्रिनेत्र गिरा था। यह ऐसा मंदिर है जहां चारों दिशाओं से प्रवेश किया जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के महाद्वार से प्रवेश के साथ ही देवी के दर्शन होते हैं। 

इस शक्तिपीठ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साल में एक बार यहां सूर्य की किरणें देवी की प्रतिमा पर सीधे पड़ती है। नवरात्रों में तो यहां इतने भक्त उमड़ते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस को मंदिर में विशेष प्रबंधन करने पड़ते हैं।   

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3. अम्बाजी का मंदिरः यह शक्ति देवी सती को समर्पित 52 शक्तिपीठों में से एक है। गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तालुका में स्थित गब्बर पहाड़ियों के ऊपर अम्बाजी का जो मंदिर बना हुआ है इसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना गया है। कहा जाता है कि यहां पर देवी सती का हृदय गिरा था। नवरात्रों में यह पर विशेष रूप से मां की पूजा-अर्चना की जाती है। 

4. हर सिद्धि माता मंदिरः मध्यप्रदेश के उज्जैन का प्रसिद्ध शक्तिपीठ हर सिद्धि माता मंदिर महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास स्थित है। इस मंदिर को हर सिद्धि माता के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर मां सती का बांया हाथ या ऊपरी होठ या फिर दोनों इस जगह पर गिरे थे और तभी इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई थी। यहां पर नवरात्रों में विशेषतौर पर सजावट की जाती है और भक्त भी भक्ति में रंगे नजर आते हैं।    

मां दुर्गा का अंश (फाइल फोटो)


5. ज्वाला देवी का मंदिरः 52 शक्तिपीठों में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधर पहाड़ी के बीच बना यह ज्वाला देवी का मंदिर भक्ति का वह संगम है जहां हमेशा भक्त जुटते हैं। कहा जाता है कि यहां पर मां सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी। ज्वालादेवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही है। इस शक्तिपीठ से यह मान्यता जुड़ी हुई है कि यहां पर जो भी भक्त दिल से मन्नत मांगता है उसकी हर मुराद पूरी होती है।  

6. नैना देवी मंदिरः हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में बना यह शक्तिपीठ मंदिर अपने पौराणिक इतिहास को लेकर जाना जाता है। कहा जाता है कि मां सती के यहां पर नेत्र गिरे थे। यहां पर एक पीपल का पेड़ है जो मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, यह अनेको शताब्दी पुराना है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाई और भगवान गणेश और हनुमान की मूर्ति है। नैना देवी के मंदिर में हर साल नवरात्रों पर भारी संख्या में भक्त जुटते हैं।     

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चार शक्तिपीठ (फाइल फोटो)

7. कामाख्या देवी मंदिरः यह शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी शहर से 8 किलोमीटर पत्विम में नीलांचल पर्वत पर स्थित है। यह माना जाता है कि भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर मां सती की योनी यहां कटकर गिरी थी। इसी मान्यता को मानते हुए इस जगह पर योनी की पूजा होती है। साल में तीन दिनों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रखा जाता है। तान्त्रिक पुजारियों के तंत्र-मंत्र सिद्धि प्राप्ति के लिए यह मंदिर सर्वोपरी माना जाता है।

8. तारापीठः पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित यह शक्तिपीठ मां तारा देवी को समर्पित है। मंदिर को लेकर यह मान्यता जुड़ी है कि यहां पर मां सती के नयन(तारा) इसी जगह गिरे थे। यह मंदिर तांत्रिक क्रियाकलापों के लिए भी जाना जाता है। प्राचीन समय में यह जगह चंदीपुर के नाम से जानी जाती थी जिसे अब भक्त तारापीठ के नाम से जानते हैं।

9.श्री वज्रेश्वरी देवी मंदिरः हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पास मालकड़ा पहाड़ी की ढलान पर उत्तर की नगरकोट में यह मंदिर बना हुआ है। यह नौ शक्तिपीठों में से एक है। यहां मां सती का बायां वक्षस्थल गिरा था। इसे स्तनपीठ भी कहा जाता है,स्तनभाग गिरने पर वह शक्ति जिस रूप में प्रकट हुई वह व्रजेश्वरी कलाई। यह शक्तिपीठ तंत्र-मंत्र, ज्योतिष विद्या और देव परंपराओं की प्राप्ति को लेकर प्रमुख माना जाता है।  

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