LIVE: गैंगेस्टर अनिल गुप्ता पर दर्ज हत्या, रंगदारी, वसूली, हिस्ट्रीशीट, गुंडा एक्ट जैसे संगीन मुकदमों की सरकारी कुंडली

डीएन संवाददाता

महीनों जेल में बीताकर जमानत पर छूटा घुघली थाने के बेलवा टीकर गांव के कोदई गुप्ता का पुत्र अनिल गुप्ता एक बार फिर रंगदारी, वसूली में लिप्त हो गया है। आठ साल के इसके आपराधिक सफरनामे पर डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव पड़ताल:

हिस्ट्रीशीटर अनिल गुप्ता का आपराधिक रिकार्ड
हिस्ट्रीशीटर अनिल गुप्ता का आपराधिक रिकार्ड

महराजगंज: सीएम योगी आदित्यनाथ का साफ फरमान है कि गिरोह बनाकर रंगदारी व वसूली करने वाले गुंडों से सख्ती से निपटा जाये। शासन की मंशा को भांपकर जिला प्रशासन ने दो-दो बार गुंडा एक्ट लगाकर जिला बदर किये जा चुके हिस्ट्रीशीटर अनिल गुप्ता पर दिसंबर महीने में गैंगेस्टर की कार्यवाही की। गैंगेस्टर का मुकदमा 238/2019 घुघुली थाने में दर्ज होते ही यह अंडरग्राउंड हो गया।

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लाख चालाकियों के बावजूद यह 8 दिसंबर को पुलिस के हत्थे चढ़ गया। थानेदार धनबीर सिंह ने इसे शिकारपुर तिराहे पर धर दबोचा और फिर ठूंस दिया जेल में। सूत्रों के मुताबिक जेल के अंदर भी इसकी रंगबाजी जारी रही, जहां जेल के पक्कों ने इसकी जमकर कुटाई की।

महीनों जेल में रहने के बाद जमानत पर अब यह छूटकर बाहर निकला है और एक बार फिर आरटीआई और लीगल नोटिस के नाम पर वसूली और आतंक का नंगा खेल खेलना इसने शुरु कर दिया है।

डाइनामाइट न्यूज़ के लखनऊ संवाददाता के मुताबिक महराजगंज पुलिस द्वारा गृह विभाग को भेजे गये पत्र दिनांक 12 दिसंबर 2019 में इस पर दर्ज मुकदमों का (देखें ग्राफिक्स) ​​​​​​सिलसिलेवार वर्णन किया है। 

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सरकारी पत्रों के मुताबिक अनिल गुप्ता सोशियो वेलफेयर लीगल सोसाइटी नाम से एक संस्था चलाता है। कई युवकों का गिरोह बनाकर यह फर्जी आरटीआई के नाम पर अवैध वसूली करता है और रंगदारी मांगता है। इसने जिला बचत अधिकारी, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड, सहायक आय़ुक्त एवं सहायक निबंधन सहकारिता, तत्कालीन तहसीलदार सदर, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी, तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी, विभिन्न ग्राम प्रधानों पर हाथ डाल अवैध वसूली की कोशिश की है।

इस पर वसूली और रंगदारी का सबसे ताजा मामला परियोजना अधिकारी, डूडा ने पंजीकृत कराया था। वर्तमान में मुरादाबाद के मंडलायुक्त और जिले के पूर्व डीएम वीरेन्द्र सिंह ने इसे ठीक से काबू में किया था और इस पर 2017 में गुंडा एक्ट ठोंक जिला बदर किया था। इस पर वर्ष 2014 में भी गुंडा एक्ट तबके जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ठोंक चुके हैं। वीरेन्द्र सिंह के जमाने में कलेक्ट्रेट और विकास भवन में जाने की इसकी हिम्मत तक नहीं पड़ती थी, वजह उत्पीड़न से आजिज लोगों ने इसे मारने के लिए दौड़ा लिया था।

डाइनामाइट न्यूज़ के हाथ लगे एक अन्य दस्तावेज दिनांक 10 नवंबर 2017 के अनुसार जांच अधिकारी/सहायक आय़ुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने जिलाधिकारी को भेजे अपने गोपनीय पत्र में यह खुलासा किया कि छद्म आरटीआई एक्टिविज्म अनिल गुप्ता के मूल आपराधिक प्रवृत्ति की वर्तमान तथा आधुनिक अभिव्यक्ति है।

जरायम की दुनिया में इस गैंगेस्टर की सबसे पहली शुरुआत ही हत्या के मुकदमे से हुई। डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक 2012 में इस पर कोठीभार थाना क्षेत्र में निक्कू जायसवाल की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। आठ साल बाद यह मुकदमा निर्णायक दौर में है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा।

 








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