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नई दिल्ली: इन दिनों हर तरफ सावन की धूम मची हुई है। आज सावन का तीसरा सोमवार है। सावन के तीसरे सोमवार पर शिव की पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है। सावन के तीसरे सोमवार पर भगवान शिव के तीन स्वरूपों की उपासना करने से अमरता का वरदान मिलता है साथ ही सारी मनोकामना पूरी होती है।
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भगवान शिव का नीलकंठ स्वरुप जिससे नियंत्रित होते हैं ग्रह
समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो शिव जी ने मानवता की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया। उन्होंने विष को अपने कंठ में ही रोक लिया , जिससे उनका कंठ नीला हो गया। नीला कंठ होने के कारण शिव जी के इस स्वरुप को नीलकंठ कहा जाता है।
ऐसे करें शिव के नीलकंठ स्वरुप की पूजा
शिव जी के नीलकंठ स्वरुप की उपासना करने के लिए, शिव लिंग पर गन्ने का रस चढ़ाएं और 'ॐ नमो नीलकंठाय' मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से ग्रहों की हर बाधा समाप्त होती है। साथ ही शत्रु बाधा, षड़यंत्र और तंत्र मंत्र जैसी चीज़ों का असर नहीं होता है।
Published : 13 August 2018, 11:01 AM IST
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