
नई दिल्ली: दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को लैंड फॉर जॉब मामले की सुनवाई हुई, जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों को राहत मिली।
इस मामले में आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई, जिसमें लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव और उनकी बेटी हेमा यादव समेत कई अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई।
जमानत पर फैसला
डाइनामाइट न्यूज के संवाददाता के अनुसार, लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हाल ही में जमानत पर अपना फैसला सुनाया था। 7 अक्टूबर 2024 को हुई सुनवाई में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के नौ आरोपियों को जमानत मिल गई थी।
सभी आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई थी। इसके बाद इस मामले की सुनवाई फिर शुरू हुई और मंगलवार को तेज प्रताप यादव और हेमा यादव समेत अन्य आरोपियों को राहत मिल गई।
इस दौरान कोर्ट ने आरोपियों को 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देते हुए जेल से बाहर आने का मौका दिया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि आरोपी अपना-अपना सिक्योरिटी बॉन्ड भी जमा करें।
लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार के सदस्य आरोपित
लैंड फॉर जॉब मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के पांच सदस्यों पर आरोप लगे थे। उनके परिवार के प्रमुख सदस्यों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी (जो बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं), उनके बेटे तेजस्वी यादव और उनकी दो बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव शामिल थीं।
यह मामला रेलवे में नौकरी के बदले जमीन देने के आरोप से जुड़ा है।
आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच जब लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल मंत्री थे, उनके कार्यकाल में भारी अनियमितताएं हुईं। यह भी आरोप है कि इस दौरान लालू के परिवार के सदस्यों ने कुछ लोगों को रेलवे में नौकरी देने के बदले में जमीन अपने नाम पर लिखवाई थी।
रेलवे में नौकरी के नाम पर गड़बड़ी
लैंड फॉर जॉब मामले की पूरी कहानी रेलवे टेंडर से जुड़ी है। आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में नौकरी देने के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ था। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई, लेकिन इस प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गईं। नौकरी के बदले इन लोगों ने अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों को दे दी।
सीबीआई जांच में पता चला कि यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से भरी हुई थी। कहा जा रहा है कि यह एक संगठित घोटाला था, जिसमें रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन ली गई और इस सबके पीछे लालू परिवार के सदस्य थे। सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
सीबीआई जांच में हुआ था ये खुलासा
सीबीआई ने इस मामले में कुल 78 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पाया गया कि यह घोटाला 2004 से 2009 तक चलता रहा, जब लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल मंत्री थे। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक रेलवे में नौकरी के बदले जमीन के सौदे किए गए और इस तरह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
लालू प्रसाद यादव के परिवार के अलावा सीबीआई ने इस मामले में अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया था। इन आरोपियों में रेलवे के कुछ अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं जो इस घोटाले में शामिल थे।
Published : 11 March 2025, 1:12 PM IST
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