भारत की कंपनी का एशिया की सबसे बड़ी कंपनी से सौदा, जानें क्या है पूरा मामला

सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के आईटीसी समूह में शामिल होने से क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Updated : 1 April 2025, 4:27 PM IST
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हरिद्वार: भारत की अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनी  इंडियन टोबैको कंपनी  ने एशिया की सबसे बड़ी पेपर मिलों में से एक, लालकुआं स्थित सेंचुरी पल्प एंड पेपर का अधिग्रहण कर लिया है। यह सौदा 3,498 करोड़ रुपये में पूरा हुआ।आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट लिमिटेड  के बोर्ड ने  सेंचुरी पल्प एंड पेपर को  आईटीसी को बेचने की घोषणा की, जिसे सोमवार को  स्लंप सेल के माध्यम से हस्तांतरण के लिए मंजूरी दे दी गई।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, 1984 में स्थापित, सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल उच्च गुणवत्ता वाले कागज उत्पादन के लिए जानी जाती है। यह इकाई उत्तराखंड के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्तमान में मिल में सात प्लांट संचालित हैं, जहां कागज, टिशू, बोर्ड और पल्प का उत्पादन होता है। इसकी उत्पादन क्षमता 1400 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। सेंचुरी के उत्पादों की भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी काफी मांग है।

मिल का कुल परिसर 200 एकड़ में फैला है, जिसमें उत्पादन इकाइयां, प्रशासनिक भवन और कर्मचारी आवास भी शामिल हैं। सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल का नाम बदलकर आईटीसी से संबद्ध किया जा सकता है। अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि होगी। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर नई नौकरियाँ  सृजित की जा सकती हैं। आईटीसी की ग्रीन पॉलिसी  के तहत पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित उत्पादन प्रक्रियाएँ अपनाई जा सकती हैं। सामुदायिक विकास: आईटीसी क्षेत्रीय विकास के लिए  सामाजिक और आर्थिक योजनाएँ लागू कर सकती है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव

आईटीसी के इस अधिग्रहण को लेकर  स्थानीय उद्योगों और नागरिकों  में चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। हालाँकि, अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बदलाव से  क्षेत्र में रोज़गार के अवसर और औद्योगिक विकास में तेज़ी आएगी। आईटीसी द्वारा इस अधिग्रहण से  उत्तराखंड के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। इससे न केवल  उत्पादन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि  स्थानीय रोज़गार और विकास योजनाओं को भी बल मिलेगा।

 

 

 

 

Published : 
  • 1 April 2025, 4:27 PM IST

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