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शिलॉन्ग: मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और पूर्वोत्तर के राज्य में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) के क्रियान्वयन के लिए उनसे हस्तक्षेप की मांग की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
संगमा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भी गया था। उन्होंने संविधान की आठवीं अनुसूची में खासी और गारो भाषाओं को शामिल करने की भी मांग की।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार एक अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा और राज्य के प्रमुख मुद्दों --- आईएलपी और दो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के मुद्दे के समाधान में उनकी दखल की मांग की। मेघालय में अधिकांश लोग गारो और खासी भाषाएं बोलते हैं।’’
आईएलपी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो किसी भारतीय नागरिक को सीमित अवधि तक संरक्षित क्षेत्र में आंतरिक यात्रा की अनुमति देने के लिए केंद्र द्वारा जारी किया जाता है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों में से अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड वर्तमान में आईएलपी शासन के अधीन हैं।
संगमा ने जनजातीय क्षेत्रों के लिए बहिष्करण प्रावधान के बावजूद जनजातीय हितों की रक्षा करने में संशोधित नागरिकता अधिनियम, 2019 की खामियों से मोदी को अवगत कराया।
वर्ष 2019 में राज्य ने ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873’ के तहत मेघालय में आईएलपी को लागू किए जाने की मांग की थी।
संगमा ने खासी और गारो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की बात पर भी जोर दिया।
अधिकारी ने कहा, ‘‘मेघालय विधानसभा ने नवंबर 2018 में इसके प्रभाव में प्रस्ताव पारित किया था और मामला फिलहाल केंद्र के समक्ष लंबित है।’’
प्रतिनिधिमंडल में विधानसभा अध्यक्ष थॉमस संगमा भी सदस्य थे। उन्होंने प्रधानमंत्री को सीमा विवाद को समाप्त करने के लिए गठित असम-मेघालय अंतरराज्यीय सीमा समितियों के बारे में जानकारी दी।
Published : 9 August 2023, 3:43 PM IST
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