
गोरखपुर: हर माह अमावस्या से पहले आने वाली रात को शिवरात्रि कहा जाता है। किंतु फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाले शिवरात्रि (Shivratri) को महाशिवरात्रि कहते हैं।
साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह रात महीने की सबसे अँधेरी रात होती है।महाशिवरात्रि साल की सबसे अंधेरी रात है और इस रात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है क्योंकि उत्तरायण या सूर्य की उत्तरी गति के पूर्वार्द्ध में आने वाली इस रात को पृथ्वी एक ख़ास स्थिति में आ जाती है, जब हमारी ऊर्जा में एक प्राकृतिक उछाल आता है।
शिवरात्रि बोधोत्सव है। ऐसा महोत्सव, जिसमें अपना बोध होता है कि हम भी शिव का अंश हैं, उनके संरक्षण में हैं। इस रात, ग्रह का उत्तरी गोलार्द्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य की भीतरी ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाती है। यह एक ऐसा दिन है, जब प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करती है।
महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे।
आधुनिक विज्ञान अनेक चरणों से होते हुए, आज उस बिंदु पर आ गया है, जहाँ उन्होंने आपको प्रमाण दे दिया है कि आप जिसे भी जीवन के रूप में जानते हैं, पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं, जिसे आप ब्रह्माण्ड और तारामंडल के रूप में जानते हैं; वह सब केवल एक ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूपों में प्रकट करती है। यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से उपजा सत्य है।हम किसी भी देवी - देवता या महात्मा आदि के जन्मदिन को रात्रि से नहीं जोड़ते। श्रीकृष्ण जी का जन्म रात्रि 12 बजे मनाते है फिर भी जन्म रात्रि शब्द का प्रयोग नहीं करते परन्तु इस रात्रि को शिवरात्रि कहा गया है। क्या इस दिन शिव जी का जन्म होता है या अवतार लेते है या अवतरण होता है।
अज्ञान रूपी घोर रात्रि जब धरती पर पापाचार,अत्याचार ,दुराचार फैलता है तब भक्त आत्माये दुखी होकर परमात्मा का आवाहन करती है,तब परमपिता परमात्मा शिव का इस धरती पर अवतरण होता है आत्मा के अंदर जो अज्ञान रूपी अन्धेरा है,वह ज्ञान सूर्य प्रकट होने से दूर हो जाता है। इसलिए इसी कलियुगी तमो प्रधान रूपी रात्रि पर अर्थात कलियुग के अंत और सतयुग के आदि के समय ( संगम पर) शिव आते है।
जब हम शिवरात्रि कहते हैं जो कि माह का सबसे अंधकारपूर्ण दिन है, तो यह एक ऐसा अवसर होता है कि व्यक्ति अपनी सीमितता को विसर्जित कर के, सृजन के उस असीम स्त्रोत का अनुभव करे, जो प्रत्येक मनुष्य में बीज रूप में उपस्थित है। महाशिवरात्रि एक अवसर और संभावना है, जब आप स्वयं को, हर मनुष्य के भीतर बसी असीम रिक्तता के अनुभव से जोड़ सकते हैं, जो कि सारे सृजन का स्त्रोत है।एक ओर शिव संहारक कहलाते हैं और दूसरी ओर वे सबसे अधिक करुणामयी भी हैं। वे बहुत ही उदार दाता हैं।उनकी करुणा के रूप विलक्षण और अद्भुत रहे हैं।
महाशिवरात्रि को मानव शरीर में उर्जाएं कुदरती तौर पर ऊपर की ओर जाती हैं। इसलिए इस रात को हम सब जागें और अपनी रीढ़ सीधी रखें ताकि हम इस रात को मौजूद अद्भुत ऊर्जा के लिए उपलब्ध हो पाएं ।हम सभी इस रात को अपने लिए एक जागरण की रात बनाएं।ब्रह्मा, विष्णु, शंकर (त्रिमूर्ति) की उत्पत्ति महेश्वर अंश से ही होती है। मूल रूप में शिव ही कर्ता, भर्ता तथा हर्ता हैं।सृष्टि का आदि कारण शिव है।शिव ही ब्रह्म हैं। ब्रह्म की परिभाषा है - ये भूत जिससे पैदा होते हैं, जन्म पाकर जिसके कारण जीवित रहते हैं और नाश होते हुए जिसमें प्रविष्ट हो जाते हैं, वही ब्रह्म है। यह परिभाषा शिव की परिभाषा है। शिव आदि तत्त्व है, वह ब्रह्म है, वह अखण्ड, अभेद्य, अच्छेद्य, निराकार, निर्गुण तत्त्व है। वह अपरिभाषेय है, वह नेति-नेति है।
देवों के देव महादेव के सबसे बड़े त्योहार महाशिवरात्रि को कल बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। भले ही महाशिवरात्रि सम्पन्न हो गई लेकिन भगवान शिव हमेशा विराजमान हैं। ये व्रत और पूजन भले ही कल पूरा हो गया हो, लेकिन शिव जी के पूजन के लिए कोई एक दिन तय नहीं है बल्कि शिवजी की पूजा अर्चना तो रोज़ाना की जानी चाहिए।
Published : 27 February 2025, 6:46 PM IST
Topics : Dynamite News easy way to please Bholenath lord shiva mahashivratri Shivratri News Shivratri Special report special importance UP Temples Worship