कांग्रेस की सातवीं सूची में 36 प्रत्‍याशियों के नामों की घोषणा, राज बब्‍बर की सीट बदली

डीएन ब्यूरो

कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशियों की सातवीं सूची 36 उम्मीदवारों के नाम के साथ जारी कर दी है। नई सूची में एक विशेष बदलाव भी किया गया है। इस सूची में कांग्रेस नेता राज बब्बर की सीट बदल दी गई है। डाइनमाइट न्यूज़ की रिपोर्ट..

राज बब्‍बर

नई दिल्‍ली: कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशियों की सातवीं सूची 36 उम्मीदवारों के नाम के साथ जारी कर दी है। नई सूची में एक विशेष बदलाव भी किया गया है इस सूची में कांग्रेस नेता राज बब्बर की सीट बदल दी गई है। उनको अब मुरादाबाद की जगह फतेहपुर सीकरी की लोकसभा सीट मिली है। वहीं, इमरान प्रताप‍गढ़ी को मुरादाबाद से उतारा गया है।

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने 36 उम्‍मीदवारों की सातवीं सूची शुक्रवार देर रात जारी कर दी है। सूची में छत्तीसगढ़ की 4, जम्मू-कश्मीर की 3, ओडिशा की 2, तमिलनाडु की 8, त्रिपुरा की 2, महाराष्ट्र की 5, तेलंगाना की एक, उत्तर प्रदेश की 9 और पुडुचेरी की एक सीट पर प्रत्याशियों का नाम जारी किया गया है। वहीं इस सूची में एक बड़ा बदलाव किया गया है। कांग्रेस ने मुरादाबाद से इमरान प्रतापगढ़ी मैदान में उतारा है जबकि अब प्रदेश पार्टी अध्यक्ष राज बब्बर को फतेहपुर सीट से प्रत्‍याशी बनाया गया है। 

पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी को तेलंगाना की खम्‍मम सीट से चुनावी मैदान में हैं। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह को पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की ऊधमपुर सीट से प्रत्‍याशी बनाया गया है।

गौरतलब है कि राज बब्बर 2009 में फतेहपुर सीकरी संसदीय सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा था। राज बब्बर को फतेहपुर सीकरी से करीब 9 हजार वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी की ओर से राज बब्बर आगरा से चुनाव जीते। हालांकि 2009 और 2004 में बीजेपी के रामशंकर कठेरिया आगरा से बड़े अंतर से जीते थे।

कांग्रेस ने पहले राज बब्बर को मुरादाबाद से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ना चाहते थे। पार्टी ने अब उनकी मांग मान ली है और इस सूची में उन्हें फतेहपुर सीकरी से टिकट दिया गया है। 

सूत्रों के अनुसार राज बब्बर फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं इसकी जानकारी उन्‍होंने पार्टी नेतृत्‍व को अवगत कराया था। इसलिए मुराबाद से उनका नाम वापस ले लिया गया।

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