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चैत्र नवरात्र की शुरुआत 28 मार्च से हुई है और आज देवी पूजा का चौथा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के स्वरुप कुष्मांडा की आराधना की जाती है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम दिया गया।
महराजगंज: नवरात्र की शुरुआत के साथ ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। मां के दरबार में श्रद्धा से सिर झुक गए हैं। नवरात्र को लेकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद मुख्यालय पर स्थित सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक शक्तिपीठ श्री श्री दुर्गा मंदिर पर भी ख़ास तैयारियां की गई हैं ताकि भक्त बिना किसी मुश्किल के श्रद्धा के सागर में डूबकर शक्ति की उपासना कर सकें। वही शक्तिपीठ श्री श्री दुर्गा मंदिर पर बुधवार को मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुशील कुमार टिबड़ेवाल भी पहुंचे जहां उन्होंने माता की आरती की। इस दौरान मंदिर में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ देखने को मिली।

जानिये कुष्माण्डा देवी कौन हैं ?
ये नवदुर्गा का चौथा स्वरुप हैं। अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्माण्डा पड़ा। ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं. मां की आठ भुजाएं हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं। संस्कृत भाषा में कुष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं और मां कुष्माण्डा को कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है। ज्योतिष में मां कुष्माण्डा का संबंध बुध ग्रह से है।
Published : 31 March 2017, 4:58 PM IST
Topics : आरती उत्तर प्रदेश कुष्मांडा चैत्र नवरात्रि धर्म नवरात्र महराजगंज हिंदू
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