
देहरादून: उत्तराखंड में तापमान बढ़ते ही जंगलों में इन दिनों आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली सहित कई जिलों में वनाग्नि से जंगलों का बड़ा हिस्सा जल चुका है। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी एक-दूसरे की रेंज का मामला बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
इससे आग पर काबू पाने में देरी हो रही है और वन संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेंज सीमा विवाद बना बड़ी बाधा
रामपुर रोड बेलबाबा के पास हल्द्वानी और भाखड़ा रेंज की सीमाओं पर लगी आग का उदाहरण ताजा है। जब आग फैली तो दोनों रेंज के अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के क्षेत्र का मामला बताकर टाल दिया। नतीजा यह रहा कि जंगल धधकता रहा और समय पर राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया।
इसी तरह, रानीबाग क्षेत्र में फतेहपुर और मनोरा रेंज के बीच भी शुक्रवार रात आग लगी। स्थानीय लोगों की सूचना के बावजूद अधिकारी सीमा विवाद में उलझे रहे और रात 11 बजे के बाद ही फायर टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में रात 1 बजे तक का समय लग गया।
सीसीएफ ने दिए सख्त निर्देश
कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) डॉ. धीरज पांडे ने कहा कि अब सभी रेंजों को संयुक्त रूप से हर आग की घटना से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आधी रात तक आग बुझाते रहे वनकर्मी
पिथौरागढ़ के ओढ़माथा जंगल में शुक्रवार देर शाम आग भड़क उठी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जाजरदेवल क्षेत्र में भी जंगल जलने से वन संपदा को नुकसान हुआ है। डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि कर्मचारी दिन और रात में मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं और आमजन से सहयोग की अपील की गई है।
स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा
कर्णप्रयाग के ग्वाड़ गांव में शुक्रवार रात जंगलों में आग लगने से सैकड़ों चौड़ी पत्ती के वृक्ष जल गए। ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालकर आग पर काबू पाया। हालांकि शनिवार दोपहर तेज हवाओं के चलते आग फिर भड़क गई। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ध्यान गांव में एसएसबी ने बुझाई आग
ध्यान गांव के शिव मंदिर के पास जंगल में लगी आग को सशस्त्र सीमा बल की 55वीं वाहिनी के जवानों ने समय रहते बुझा दिया। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए आग फैलने से पहले ही उस पर काबू पा लिया।
उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाएं न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं, बल्कि विभागीय तालमेल की कमी से स्थिति और भी भयावह हो रही है। समय रहते विभागों के बीच बेहतर समन्वय और स्थानीय लोगों के सहयोग से ही इस चुनौती का सामना किया जा सकता है।
Published : 7 April 2025, 6:19 PM IST
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