DN Exclusive लखनऊ: अफसरों की सांठगांठ से कौशल विकास योजना की साख धूमिल

जय प्रकाश पाठक

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप और पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिये कुछ भ्रष्ट अफसर अपना स्वार्थ साधने में लगे हुए है, जिस कारण इस महत्वपूर्ण योजना की साख प्रभावित हो रही है।


लखनऊ: केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप और पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिये युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर कुछ भ्रष्ट अफसरों द्वारा सांठगांठ कर युवाओं को तय वेतन से कम रकम देने और अवैध कमाई करने का मामला सामने आया है। इसी योजना के तहत प्रशिक्षण पाए कुछ युवा  सरकारी अफसरों की इसी काली करतूत से परेशान होकर आज सीएम आवास तक पहुंचे, जहां उन्होंने एक ज्ञापन भी सौंपा और इस योजना से जुड़े अफसरों और ठेकेदारों के खिलाफ जांच कर उचित कार्यवाही की मांग की।

सर्विस मैनेजर और ठेकेदार की सांठगांठ

जानकारी के मुताबिक कौशल विकास योजना के माध्यम से यूपी के कानपुर में कुछ युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और इसके बाद उन्हें परिवहन निगम में संविदा पर नौकरी करने के लिए भेजा गया। लेकिन सर्विस मैनेजर परिवहन निगम कानपुर रमेश कुमार ने वहां के ठेकेदार इलियास खान के साथ सांठगांठ कर निगम में प्रशिक्षित होकर आए युवाओं का शोषण करना शुरू कर दिया। शुरुआत में प्रशिक्षित युवाओं को 9 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही गई। लेकिन 9 हजार के बजाये उन्हें 3500 रुपए ही दिए जाने लगे। इस बाबत जब प्रशिक्षित कर्मचारियों ने सर्विस मैनेजर रमेश कुमार से मिलकर शिकायत की तो उन्होंने युवाओं को धमकाकर नौकरी से निकाल दिया। अफसर की इस करतूत के खिलाफ कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रशिक्षित ये सभी कर्मचारी आज सीएम आवास पहुंचे और इस पूरे मामले की जांच कराकर उन्हें उचित मासिक वेतन दिलाए जाने की मांग की।

बताया 9 हजार वेतन, दिये 3500 रूपये

डाइनामाइट न्यूज़ से बात करते हुए अफसर की शोषण का शिकार बने एक कर्मचारी रोहित कुमार ने बताया कि कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण पाकर जब उन्हें रोडवेज डिपो कानपुर में भेजा गया तो उन्हें संविदा पर रखे जाने की बात बताई गई। लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि उन्हें आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखा गया है और उन्हें 9 हजार मासिक के बजाय मात्र 3500 रूपये मासिक दिया जाने लगा।

शिकायतकर्ता युवा

 

नहीं दी गयी वेतन और पीएफ स्लिप

अफसरों और ठेकेदार पर सांठगांठ का आरोप लगाते हुए इन युवकों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से संविदा पर उक्त डिपो पर काम कर रहे है। जब उन्हें तय वेतन नहीं मिला तो उन्होंने इसकी शिकायत अफसर से की। अफसर ने उन्हें ठेकेदार के पास भेजा और ठेकेदार ने पल्ला झाड़ते हुए वापस अफसर के पास जाने को कहा। यह सिलसिला कई लंबे समय तक चलता रहा। युवकों के मुताबिक उन्हें जो वेतन दिया जाता था, पहले उसका भुगतान कैश में होता था और इसकी ऐवज में उनको वेतन की कोई स्लिप या पावती भी नहीं दी जाती थी। उन्हें बताया जाता था कि उनकी राशि में से कुछ हिस्सा पीएफ भी काटा जा रहा है, लेकिन कई बार मांगने के बाद भी पीएफ स्लिप नहीं दी गयी। पिछले कुछ समय से उनका पैसा बैंक अकाउंट में आने लगा, लेकिन फिर भी पैसा तय रकम नहीं दी गयी। युवकों ने शक जताया है कि मिलीभगत के चलते अफसर और ठेकेदार बोगस कर्मचारियों के नाम पर उनका पैसा डकार जाते हैं। 

एक ठेकेदार के पास 6 रोडबेज डिपो का चार्ज 

वही ठेकेदार इलियास खान पूर्व में असिस्टेंट रीजनल मैनेजर के पद पर तैनात रह चुका है और रिटायर होने के बाद उसे ही सर्विस मैनेजर रमेश कुमार ने सांठगांठ कर वहां का ठेकेदार बना दिया है। उसके पास कानपुर के 6 रोडबेज डिपो का चार्ज है, जिसमें फजलगंज, विकास नगर, आजाद नगर, किदवई नगर उन्नाव, फतेहपुर, क्षेत्रीय कार्यशाला भी शामिल है। बताया जता है कि इन सभी डिपो में काम कर रहे कर्मचारियों का लंबे समय से आर्थिक शोषण किया जा रहा है और इस पूरे खेल में वहां के सर्विस मैनेजर समेत और कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। 
 

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