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रायबरेली: जनपद मे योगी सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति की मिसाल सामने आई है। यहां जिलाधिकारी हर्षिता माथुर को भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ जाँच का निर्देश दिया हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी सौम्यशील सिंह ने मामले की जांच कराई तो विकास कार्य में भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलने पर उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी आलोक कुमार शुक्ला को निलंबित कर दिया। दरअसल आलोक कुमार शुक्ला का ट्रांसफर दूसरी ग्राम सभा में किया गया था।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार जिला पंचायतराज अधिकारी की जांच में सामने आया कि पूर्व में सताव ब्लॉक के कोनसा में तैनात रहे आलोक कुमार ने अपने ट्रांसफर आदेश के बाद भी कई कार्यों के भुगतान किये थे। इसके अलावा उन्होंने हैण्ड पंप के रिबोर का पैसा भी रिलीज़ किया था जबकि स्थलीय निरीक्षण में यह सच नहीं पाया गया। फिलहाल आलोक कुमार ने अपनी तैनाती के दौरान लगभग छह लाख की वित्तीय अनिमितता की हैं।
सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सताव ब्लाक को कोनसा ग्राम सभा में कार्यरत आलोक कुमार शुक्ला का वहां से ट्रांसफर किया गया था। जिलाधिकारी को शिकायत मिली कि 6 लाख रुपये के आसपास का पेमेंट वीडीओ द्वारा किया गया है। जब इसमें जांच की गई तो पाया गया कि इसके पेमेंट वाली बात सही है। इसमें से एक ऐसी पेमेंट थी कि जिसमे हैंडपंप के रिबोर के लिए 2 लाख रुपये का पेमेंट किया गया था। जिसका स्थलीय निरीक्षण भी नही हुआ था। इसकी सूची प्रोवाइड कराई गई थी। इसकी जांच की गई तो पाया गया कि संदिग्ध तरीके से यह पेमेंट किया गया है। वीडीओ के ऊपर सस्पेंशन की कार्रवाई की गई है।
वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने भी सलोन ब्लाक के बघोना के स्कूल में निर्माण कार्य में अनियमितता पाए जाने पर एक अध्यापक राकेश कुमार सिंह के खिलाफ़ सस्पेंसन कि कार्रवाई की है।
Published : 6 March 2025, 7:18 PM IST
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