
नई दिल्ली: इंडिया गठबंधन में मतभेद और आम आदमी पार्टी के साथ सियासी तलवारें खिंचने के बाद कांग्रेस अब बिहार में फूंक फूंककर कदम बढ़ाने की तैयारी में है। उसका प्रयास है कि अपने सबसे भरोसेमंद और पुराने साथी लालू प्रसाद यादव के साथ किसी तरह की कड़वाहट पैदा न हो।
बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं और यह आशंका पहले से जताई जा रही थी कि कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर तकरार पैदा हो सकती है।
सूत्रों की माने तो कांग्रेस ने मोहन प्रकाश जैसे वरिष्ठ नेता को हटाकर युवा नेता कृष्णा अल्लावरू को बिहार का प्रभार सौंपा है तो तो उसके पीछे भी रणनीति है।
उन्होंने कहा, "अल्लावरू राहुल गांधी के खास हैं। उन्हें प्रभारी बनाने का मतलब है कि लालू और राहुल के बीच सीधी हॉटलाइन होगी। ऐसे में इस बात की बहुत कम गुंजाइश है कि सीट बंटवारे को लेकर कोई तकरार पैदा हो।"
कांग्रेस ने पिछली बार बिहार की 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह सिर्फ 19 जीत पाई थी। पिछले विधानसभा में कांग्रेस और राजद के बीच सीटों के तालमेल को लेकर सन्नी रस्साकस्सी चली थी। लालू और गांधी परिवार के बीच सीधे बातचीत के बात मामला सुलझा था।
ऐराजद इस बार कांग्रेस को पिछली बार की तरह 70 सीटें देने के मूड में नहीं है। ऐसे में संभव है कि कांग्रेस को थोड़ी कम सीटों से संतोष करना पड़ सकता है।
वैसे, बिहार कांग्रेस से जुड़े एक धडे का मानना है कि किसी ऐसे अनुभवी नेता को प्रदेश प्रभारी के जिम्मेदारी सौंपने की जरूरत थी जो तेजस्वी यादव के साथ ही लालू यादव से भी सहजता के साथ बात कर सके।
अल्लावरू भारतीय युवा कांग्रेस में पिछले कई वर्षों से प्रभारी थे। उन्हें संगठन और युवा प्रतिभाओं को की खोज का जानकार माना जाता है।
उनके प्रभारी रहने के दौरान युवा कांग्रेस के संगठन को मजबूती मिली और कई युवा नेताओं ने लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं का रुख किया।
बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव के समय शक्ति सिंह गोहिल कांग्रेस के प्रभारी थे, जिनके साथ भी राजद के रिश्ते सहज नहीं थे। इसके बाद कांग्रेस ने भक्त चरण दास को प्रभारी बनाया और उनके समय भी दोनों पार्टियों के संबंधों में कई बार खटास देखी गई। लालू यादव ने एक बार भक्त चरण दास को "भकचोनर" कह दिया था।
भक्त चरण दास के बाद कांग्रेस ने पूर्व समाजवादी नेता मोहन प्रकाश को बिहार का प्रभारी बनाया और उनके समय भी कांग्रेस और राजद के संबंध मधुर नहीं हो सके।
अब कांग्रेस ने राहुल के एक करीबी युवा नेता को प्रभारी बनाकर यह कोशिश की है कि लालू परिवार को शिकायत का का कम मौका दिया जाए और बातचीत सीधे उच्चतम स्तर पर हो।
Published : 16 February 2025, 4:31 PM IST
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