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बेंगलुरू: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यहां अवैध होर्डिंग्स और बैनरों के मुद्दे पर बृहद बेंगलुरू महानगर पालिका (बीबीएमपी) द्वारा दायर अनुपालन रिपोर्ट पर नाखुशी जाहिर की है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 9,570 अनधिकृत होर्डिंग, बैनर और फ्लेक्स में से केवल 53 प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज किए जाने पर आश्चर्य व्यक्त किया।
इन बैनरों और होर्डिंग को प्राधिकरण ने जनवरी 2023 से पहचानने का दावा किया था।
मईगे गौड़ा द्वारा 2018 में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि अधिकारी 'कर्नाटक ओपन प्लेसेस' (विरूपण निवारण) अधिनियम को लागू करने में विफल रहे।
अनुपालन रिपोर्ट में बीबीएमपी के प्रत्येक जोन में अवैध बैनर और होर्डिंग्स का विवरण था।
उच्च न्यायालय की पीठ ने रिपोर्ट को 'आंखों में धूल झोंकने वाला' बताते हुए कहा कि 'आप उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं जो इन बैनरों को अपने महिमामंडन के लिए लगा रहे हैं। आप बैनर बनाने वाले को पकड़ रहे हैं। यह तर्कहीन, अतार्किक और अनुचित है। इससे साफ पता चलता है कि आपके अधिकारी कार्रवाई करने को लेकर गंभीर नहीं हैं।'
पीठ ने कहा 'चिन्हित अनाधिकृत फ्लेक्स बैनर आदि की कुल संख्या 9,570 थी जबकि, दर्ज की गई शिकायतों और एफआईआर की संख्या क्रमशः 80 और 53 है। यह भी आश्चर्यजनक है कि केवल बेंगलुरु (पश्चिम) में चिन्हित फ्लेक्स/बैनर की संख्या 2,521 हैं जबकि दर्ज की गई शिकायतें और एफआईआर की संख्या क्रमशः 5 और 6 हैं।'
अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए, अदालत ने सोमवार को 'ग्रीष्मकालीन अवकाश' तक के लिए मामले को स्थगित करने का आदेश दिया।
Published : 21 March 2023, 4:14 PM IST
Topics : अवैध होर्डिंग्स आंखों झोंकने बीबीएमपी
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