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नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर 5 अप्रैल को अष्टमी और 6 अप्रैल को नवमी तिथि है। जो हवन और पूजन के लिए बेहद शुभ मानी जाती हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन विशेष रूप से हवन और पूजा करने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। कई लोग अष्टमी को तो कई लोग नवमी को हवन पूजन करते हैं, क्योंकि इन दिनों विशेष योग और मुहूर्त होते हैं। जो समृद्धि और सुख-शांति का कारण बनते हैं।
हवन और पूजा के दौरान विधियों का पालन करना बेहद जरूरी है ताकि पूजा का फल प्राप्त हो सके। हवन को यदि पंडित द्वारा कराया जाए तो यह अधिक शुभ और फलदायक माना जाता है, लेकिन आप इसे घर पर भी सही तरीके से कर सकते हैं।
शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि के दौरान 5 अप्रैल को अष्टमी तिथि का शुभ समय पूरे दिन है, लेकिन विशेष पूजा का मुहूर्त 10:30 से 12:00 बजे तक रहेगा। वहीं रामनवमी के दिन 6 अप्रैल को सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक बहुत ही लाभकारी मुहूर्त है। इस दिन पूजा और कन्या पूजन दोनों को श्रेष्ठ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार 5 अप्रैल को सूर्योदनी अष्टमी तिथि पुनर्वसु नक्षत्र के साथ शुभ योग में है जो शाम 7:29 बजे तक रहेगा। वहीं 6 अप्रैल को नवमी तिथि भी शुभ योग के साथ शाम 7:26 बजे तक रहेगी।
नवरात्रि हवन पूजा की विधि
हवन करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और शुद्ध वस्त्र पहनें। इसके बाद हवन कुंड को साफ कर उसे एक उपयुक्त स्थान पर स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और फिर गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आवाहन करें।
अब हवन कुंड में आम की लकड़ी, घी और कपूर से अग्नि प्रज्जवलित करें और 'ऊं आग्नेय नम: स्वाहा' मंत्र बोलते हुए अग्नि देव का ध्यान करें। इसके बाद 'ऊं गणेशाय नम: स्वाहा' मंत्र बोलकर भगवान गणेश को आहुति अर्पित करें। फिर नौ ग्रहों के लिए 'ऊं नवग्रहाय नम: स्वाहा' और कुल देवता के लिए 'ऊं कुल देवताय नम: स्वाहा' मंत्र बोलें। इसके बाद देवी-देवताओं के नाम से आहुति डालें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवन में कम से कम 108 आहुति डालनी चाहिए और यह सभी देवी दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान करते हुए अर्पित करें।
हवन के बाद बची हुई सामग्री को एक पान के पत्ते पर रखकर उसमें पूड़ी, हलवा, चना, सुपारी, लौंग आदि रखें और आहुति डालें। अंत में पूरी श्रद्धा के साथ मां की आरती करें, भोग अर्पित करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।
Published : 5 April 2025, 12:56 PM IST
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