बीजू जनता दल : विज्ञापनों में पार्टी चिह्न इस्तेमाल करने को लेकर बीजद के खिलाफ भाजपा नेता की याचिका खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार द्वारा विज्ञापनों में अपनी कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करते हुएपा र्टी के चिह्न ‘शंख’ के इस्तेमाल के खिलाफ भाजपा नेता जतिन मोहंती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इंकार कर दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट डाइनामाइट न्यूज़ पर

Updated : 12 January 2024, 3:54 PM IST
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नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार द्वारा विज्ञापनों में अपनी कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करते हुए पार्टी के चिह्न ‘शंख’ के इस्तेमाल के खिलाफ भाजपा नेता जतिन मोहंती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से शुक्रवार को इंकार कर दिया।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार  भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के नेता मोहंती ने याचिका में बीजू जनता दल के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया था।

अदालत ने ओडिशा उच्च न्यायालय के बजाय उसका रुख करने के लिए भी याचिकाकर्ता पर सवाल उठाए क्योंकि ये विज्ञापन ओडिशा में जारी किए गए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पी एस अरोड़ा की पीठ ने कहा, ‘‘आप यहां क्यों आए हैं? ओडिशा जाइये और उचित अदालत के समक्ष इस मामले को उठाइये।’’

उसने कहा कि यह किसी एक राज्य की बात नहीं है और अब हर राज्य की यही कहानी है।

पीठ के याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करने के बाद मोहंती ने इसे (याचिका को) वापस लेने और उचित अदालत के समक्ष दायर करने देने की अनुमति मांगी।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बीजद ने जनता के पैसों का मनमाना इस्तेमाल और दुरुपयोग किया। उसने ओडिशा के समाचार पत्रों, टीवी चैनलों, बसों और सोशल मीडिया मंचों पर ‘शंख’ चिह्न का इस्तेमाल कर राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार किया जो जनता के करोड़ों रुपये के धन का दुरुपयोग है।

याचिका में दावा किया गया है कि एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार पार्टी ने पिछले पांच वर्षों में विज्ञापनों पर 378 करोड़ रुपये खर्च किए।

मोहंती के वकील के रूप में भाजपा की ओडिशा इकाई के महासचिव ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह भारत के निर्वाचन आयोग को ओडिशा सरकार तथा बीजद के खिलाफ 10 नवंबर 2023 को दिए उसके आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दें।

इस पर पीठ ने कहा कि विज्ञापन ओडिशा में प्रकाशित किए गए और वह वहां की अदालत का रुख कर सकते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप वहां जाइए, वे निर्णय लेंगे। हर कोई यहां आ रहा है, हम यहां सब चीजों पर फैसला करने के लिए नहीं बैठे हैं। ओडिशा उच्च न्यायालय जाइए, दिल्ली उच्च न्यायालय न आएं।’’

 

Published : 
  • 12 January 2024, 3:54 PM IST

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