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भोपाल/नई दिल्ली: द्वारका एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का रविवार को निधन हो गया। 99 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांसें ली। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था और जेल भी गए थे। उनके निधन की खबर से समूचे संत समाज में शोक की लहर छा गई है।
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में दोपहर साढ़े 3 बजे अंतिम सांस ली। स्वरूपानंद सरस्वती को हिंदुओं का सबसे बड़ा धर्मगुरु माना जाता था। देश-विदेश में उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या है। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण के लिए लंबी लड़ाई लड़ी।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती 1982 में गुजरात में द्वारका शारदा पीठ और बद्रीनाथ में ज्योतिर मठ के शंकराचार्य बने थे।
उनका जन्म 2 सितम्बर 1924 को मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी जिले में जबलपुर के पास दिघोरी गांव में हुआ था। उन्होंने नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया था और धर्म यात्रायें प्रारम्भ कर दी थीं।
उन्होंने बाल्यकाल में ही काशी पहुंचकर ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। इसके बाद वे हमेशा के लिये धर्म और आध्यात्म में छाते रहे।
Published : 11 September 2022, 5:02 PM IST
Topics : नई दिल्ली निधन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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