11 मौतें, लंबी जांच और फिर राहत! आखिर कैसे अग्निकांडों के बड़े जिम्मेदार बच निकले?

लखनऊ के दो बड़े होटल अग्निकांडों में 11 लोगों की मौत हुई, जांच बैठी, अफसरों और इंजीनियरों की लंबी सूची बनी, लेकिन सालों बाद नतीजा ऐसा निकला जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। कई बड़े अधिकारी बरी हो गए, जबकि कुछ पर मामूली कार्रवाई हुई।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 June 2026, 12:02 PM IST

Lucknow: लखनऊ में हुए दो बड़े होटल अग्निकांडों ने कभी पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इन हादसों में कुल 11 लोगों की जान चली गई थी। उस समय शासन से लेकर प्रशासन तक हर तरफ हड़कंप मच गया। जांच के आदेश दिए गए, जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की लंबी सूची तैयार हुई, लेकिन समय बीतने के साथ कार्रवाई की धार भी कमजोर पड़ती गई।

आज हालात ऐसे हैं कि जिन मामलों में सख्त कार्रवाई की उम्मीद थी, उनमें कई बड़े अधिकारी बिना किसी दंड के बरी हो चुके हैं। कुछ पर केवल मामूली कार्रवाई हुई और कुछ की पेंशन में थोड़ी कटौती कर मामला समाप्त कर दिया गया।

चारबाग के होटल अग्निकांड ने मचा दिया था हड़कंप

19 जून 2018 को चारबाग स्थित होटल एसएसजे में भीषण आग लगी थी। आग इतनी तेजी से फैली कि बगल में मौजूद होटल विराट भी इसकी चपेट में आ गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद जांच शुरू हुई तो सामने आया कि दोनों होटल कई निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर संचालित किए जा रहे थे। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दो पीसीएस अधिकारियों समेत 22 लोगों को जिम्मेदार मानते हुए शासन को कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी थी।

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उस समय ऐसा लगा था कि इस मामले में बड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन जांच का सफर वर्षों तक चलता रहा।

बड़े अधिकारी हो गए बरी

लंबी जांच के बाद जो निष्कर्ष सामने आया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। तत्कालीन संयुक्त सचिव रहे पीसीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्र को बिना किसी दंड के बरी कर दिया गया। इसी तरह उस समय एलडीए में संयुक्त सचिव रहे पीसीएस अधिकारी बिरेंद्र कुमार पांडेय को भी राहत मिल गई। इसके अलावा कई अभियंता और अधिकारी भी दोषमुक्त घोषित कर दिए गए। जिन लोगों पर कार्रवाई हुई भी, उनमें ज्यादातर को पेंशन कटौती जैसी हल्की सजा दी गई।

लेवाना अग्निकांड में भी दोहराई गई कहानी

साल 2022 में मदन मोहन मालवीय मार्ग स्थित होटल लेवाना सुइट्स में आग लगने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। इस घटना ने भी पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। जांच के दौरान एलडीए ने आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी माना था और कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी थी। लेकिन जांच पूरी होने के बाद यहां भी तस्वीर काफी बदली हुई नजर आई।

आठ आरोपियों में से चार को पूरी तरह बरी कर दिया गया। बाकी चार पर भी अपेक्षाकृत हल्की कार्रवाई हुई। दो अधिकारियों का डिमोशन किया गया, एक की पेंशन में मामूली कटौती हुई और एक अधिकारी को निलंबित किया गया, जो बाद में बहाल होकर फिर से तैनाती पा चुके हैं।

होटल एसएसजे और विराट मामले में किसे मिली राहत?

इस मामले में कई अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता जांच के दायरे में आए थे। लेकिन बड़ी संख्या में अधिकारियों को बरी कर दिया गया। कई अधिकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे, जबकि कुछ की जांच के दौरान ही मृत्यु हो गई। मृत अधिकारियों को भी जांच में दोषमुक्त माना गया। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, उनमें चार सेवानिवृत्त अवर अभियंताओं की पेंशन में तीन से सात प्रतिशत तक की कटौती की गई। यही इस बड़े मामले की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई बनकर सामने आई।

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लेवाना मामले में भी कार्रवाई सीमित रही

होटल लेवाना अग्निकांड में भी चार अधिकारियों को बरी कर दिया गया। जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें एक सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता की पेंशन में केवल दो प्रतिशत कटौती की गई। दो अवर अभियंताओं को एक पद नीचे किया गया, जबकि एक अधिकारी का निलंबन बाद में समाप्त कर दिया गया और उन्हें दोबारा तैनाती मिल गई।

अब अलीगंज अग्निकांड को लेकर उठ रहे सवाल

पिछले मामलों के नतीजे सामने आने के बाद अब लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अलीगंज अग्निकांड की जांच का भी यही अंजाम होगा? हर बड़े हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं, जिम्मेदारों की सूची तैयार होती है और सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। लेकिन समय बीतने के साथ मामले फाइलों में दब जाते हैं और कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

इसी वजह से दोनों बड़े होटल अग्निकांडों के नतीजे अब प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। लखनऊ के इन दोनों अग्निकांडों में 11 लोगों की जान चली गई, लेकिन वर्षों लंबी जांच के बाद जो कार्रवाई सामने आई, उसने पीड़ित परिवारों और आम लोगों के मन में कई सवाल छोड़ दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े हादसों की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या उसे वास्तव में उसकी गंभीरता के अनुरूप सजा मिली?

Location :  Lucknow

Published :  25 June 2026, 12:02 PM IST