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सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। खगोलीय दृष्टि से यह सामान्य प्राकृतिक घटना है, लेकिन ज्योतिष और धर्मशास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया गया है। शास्त्रों में इसे “संवेदनशील अवधि” माना गया है, जब सूर्य की ऊर्जा अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती है और वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। (Img- Internet)
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। खगोलीय दृष्टि से यह सामान्य प्राकृतिक घटना है, लेकिन ज्योतिष और धर्मशास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया गया है। शास्त्रों में इसे “संवेदनशील अवधि” माना गया है, जब सूर्य की ऊर्जा अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती है और वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। (Img- Internet)