Amarnath Yatra Big Update: अब लद्दाख से भी होगी अमरनाथ यात्रा, सिर्फ 6 किलोमीटर का बनेगा तीसरा सबसे छोटा मार्ग!

अमरनाथ यात्रा के लिए लद्दाख के मीनामर्ग से पवित्र गुफा तक 6 किमी लंबा तीसरा मार्ग बनाने की तैयारी शुरू। इस बेहद छोटे और सुरक्षित रास्ते से श्रद्धालु अब मात्र एक दिन में दर्शन कर सकेंगे। जानें इस नए रूट की पूरी डिटेल।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 11 July 2026, 9:09 AM IST
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New Delhi: बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए एक बेहद खुशखबरी वाली खबर सामने आ रही है। श्री अमरनाथ धाम की यात्रा को और अधिक सुलभ, सुरक्षित और छोटा बनाने के लिए अब तीसरे मार्ग को तैयार करने की संभावनाओं पर तेजी से काम शुरू हो चुका है।

यह नया और प्रस्तावित मार्ग लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मीनामर्ग (द्रास) को कश्मीर घाटी में समुद्रतल से लगभग 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीअमरनाथ जी की पवित्र गुफा से सीधे जोड़ेगा। इस नए रास्ते के बनने से श्रद्धालुओं को बेहद आसानी होगी।

सिर्फ 6 किलोमीटर का होगा रास्ता

वर्तमान समय में पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए दो पारंपरिक मार्ग उपलब्ध हैं पहला बालटाल और दूसरा पहलगाम। बालटाल से पवित्र गुफा की दूरी लगभग 14 किलोमीटर है, जिसे साल 1999 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। वहीं, पहलगाम मार्ग से यह दूरी लगभग 34 किलोमीटर बैठती है।

इसके मुकाबले लद्दाख से बनने वाला यह तीसरा वैकल्पिक मार्ग मात्र 6 किलोमीटर लंबा होगा। दूरी बेहद कम होने की वजह से श्रद्धालु अब महज एक ही दिन में पवित्र गुफा के दर्शन कर वापस लौट सकेंगे। लद्दाख आने वाले पर्यटक भी आसानी से बाबा बर्फानी के दर्शन कर पाएंगे।

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जोजिला सुरंग के पास से शुरू होगा मार्ग

लद्दाख के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्तावित मार्ग निर्माणाधीन जोजिला सुरंग के पूर्वी मुहाने (मीनामर्ग-द्रास) से शुरू होकर पवित्र गुफा तक जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जब जोजिला सुरंग बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तो यह लद्दाख और कश्मीर के बीच हर मौसम में चालू रहने वाला सदाबहार संपर्क मार्ग बन जाएगी।

ऐसी स्थिति में मीनामर्ग से पवित्र गुफा तक का यह नया मार्ग सर्दियों के दिनों में भी खुला रह सकता है, जिससे यात्रा की अवधि और संभावनाओं में बड़ा विस्तार होगा।

भौगोलिक रूप से अधिक सुरक्षित और अनुकूल है नया रास्ता

विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस नए मार्ग की भौगोलिक परिस्थितियां मौजूदा बालटाल और पहलगाम मार्गों की तुलना में कहीं अधिक अनुकूल और सुरक्षित हैं। इस क्षेत्र में घाटियां काफी चौड़ी हैं, जिससे भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम रहेगा।

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साथ ही, चौड़ी घाटियों के कारण श्रद्धालुओं के रुकने, ठहरने, लंगर और चिकित्सा जैसी विभिन्न बुनियादी सुविधाएं तैयार करने के लिए प्रशासन को पर्याप्त और सुरक्षित स्थान मिल सकेगा। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना इस प्रस्ताव को लेकर बेहद गंभीर हैं और उन्होंने सीमा सड़क संगठन (BRO) के साथ चर्चा कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

Location :  New Delhi

Published :  11 July 2026, 9:09 AM IST

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