Women Reservation Bill: संसद में अमित शाह का विपक्ष पर करारा जवाब, जानिए क्या-क्या कहा….

महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष बिल का समर्थन करने का दिखावा कर रहा है, जबकि असल में उसका विरोध कर रहा है। शाह ने परिसीमन, जनगणना और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 17 April 2026, 7:35 PM IST

New Delhi: महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में हुई बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने औपचारिक रूप से बिल का समर्थन जरूर किया, लेकिन उनकी बातों में विरोध साफ नजर आया।

अमित शाह ने कहा कि विपक्ष ने अगर-मगर और किंतु-परंतु के जरिए बिल को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विरोध केवल प्रक्रिया का नहीं, बल्कि महिला आरक्षण के मूल उद्देश्य का है। शाह ने साफ किया कि इस बिल का मकसद महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विपक्षी नेता सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि इसका सीधा असर अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है।

परिसीमन और जनगणना पर सरकार का पक्ष

अमित शाह ने संसद में परिसीमन (डीलिमिटेशन) और जनगणना को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, क्योंकि 1976 से सीटों का परिसीमन रोका गया था।

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उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्दिरा गांधी सरकार के समय सीटों को फ्रीज कर दिया गया था, जिससे आज तक असमानता बनी हुई है। शाह ने कहा कि सरकार सीटें कम नहीं कर रही, बल्कि सभी राज्यों में 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे हर वोट की कीमत बराबर हो सके।

जनगणना में देरी पर उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराने का फैसला कर लिया है, जिसमें व्यक्तियों की गिनती के दौरान जाति का कॉलम भी शामिल होगा।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और महिला सशक्तिकरण पर जोर

अमित शाह ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दल नहीं चाहते कि 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू हो। शाह ने यह भी कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके अधिकारों में बाधा कौन डाल रहा है। उन्होंने धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस सिद्धांत में विश्वास नहीं रखती। आरक्षण केवल सामाजिक और आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।

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अपने संबोधन में शाह ने बीजेपी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने महिलाओं को नेतृत्व के अवसर दिए हैं और देश को एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू मिली हैं। अंत में उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और सरकार इसे हर हाल में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Location :  New Delhi

Published :  17 April 2026, 7:35 PM IST