
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Image Source: Pinterest)
New Delhi: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने अब अपनी रणनीति और तेज कर दी है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश की जा रही है।
विपक्षी खेमे में 9 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में बड़े नेताओं की बैठक और विरोध मार्च की संभावना भी जताई जा रही है। यानी आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थानों तक और जोर पकड़ सकता है।
इससे पहले 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत करीब 300 सांसद इस मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन में करीब नौ घंटे तक धरना दिया।
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बाद में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों को दिल्ली में ही रहने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की रणनीतिक बैठक भी बुलाई गई है।
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस, की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की भी चर्चा है। इसके लिए हस्ताक्षर जुटाने और नोटिस तैयार करने पर काम किए जाने की बात सामने आई है।
विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में मतदाता सूची में बदलाव और फॉर्म-6 से जुड़े नियमों में गैर-कानूनी और एकतरफा बदलाव किए गए। विपक्ष ने यह भी दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधु ने कई फैसलों पर असहमति जताई, इसके बावजूद फैसले आगे बढ़ाए गए।
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया है। निर्वाचन आयोग ने भी कहा था कि तय समय तक विपक्ष की ओर से बैठक का कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला था। आयोग ने संसद एनेक्सी में ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने की पेशकश की थी, जिसे सांसदों ने स्वीकार नहीं किया।
Location : New Delhi
Published : 7 October 2026, 2:11 PM IST