Ghatal Master Plan: घाटाल में बाढ़ से मिलेगी राहत? केंद्र और राज्य मिलकर खर्च करेंगे करोड़ों, जानें कब तक पूरा होगा काम

पश्चिम बंगाल के घाटाल में हर साल आने वाली बाढ़ से लोगों को राहत दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मास्टर प्लान के लिए 1,200 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस परियोजना पर खर्च करेंगी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 27 October 2026, 9:22 PM IST

Kolkata: पश्चिम बंगाल के घाटाल क्षेत्र में हर साल बाढ़ और जलभराव से परेशान रहने वाले लोगों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घाटाल मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने के लिए चालू वित्त वर्ष में 1,200 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की है। इस परियोजना का मकसद बरसात के दौरान होने वाली तबाही को कम करना और प्रभावित इलाकों में पानी की निकासी बेहतर बनाना है।

केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 30 सितंबर 2026 को घाटाल मास्टर प्लान के लिए बजट और काम की समय-सीमा का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि परियोजना की लागत में केंद्र सरकार 50 प्रतिशत और राज्य सरकार बाकी 50 प्रतिशत का योगदान देगी। जमीन से जुड़े कामों के लिए आपदा प्रबंधन विभाग से भी सहायता लेने की बात कही गई है।

सरकार ने परियोजना के बड़े हिस्से को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, ताकि अगले मानसून से पहले बाढ़ से बचाव के जरूरी काम आगे बढ़ाए जा सकें।

हर साल बाढ़ से क्यों जूझता है घाटाल?

पश्चिम मेदिनीपुर जिले का घाटाल क्षेत्र निचले और नदी के आसपास बसे इलाकों में शामिल है। यहां बरसात के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने और पानी की निकासी में परेशानी के कारण बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन जाती है। इसका असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहता। खेतों में पानी भरने से फसलें प्रभावित होती हैं, सड़क संपर्क टूट सकता है और लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है। कई इलाकों में पानी लंबे समय तक जमा रहने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

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इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए घाटाल मास्टर प्लान तैयार किया गया है। पश्चिम बंगाल के सिंचाई एवं जलमार्ग विभाग के अनुसार, इस योजना में नदी की खुदाई, तटबंधों को मजबूत करना, जल निकासी के इंतजाम और पुलों से जुड़े काम शामिल हैं।

योजना में क्या-क्या काम होंगे?

घाटाल मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पानी की निकासी और नदी प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इसके तहत कई जगहों पर नदी तल की खुदाई और मौजूदा तटबंधों को ऊंचा व मजबूत करने की योजना है।

इसके अलावा, पानी निकालने के लिए पंप हाउस और जल नियंत्रण से जुड़े ढांचे बनाने, कुछ पुलों को चौड़ा करने और जरूरत के अनुसार नए पुलों के निर्माण जैसे काम भी योजना का हिस्सा हैं। इन कामों से बरसात के दौरान पानी की निकासी बेहतर होने और बाढ़ का असर कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि परियोजना के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से होता है।

मालदा में गंगा कटाव की समस्या भी गंभीर

पश्चिम बंगाल के कुछ अन्य इलाकों में नदी कटाव भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। मालदा जिले में गंगा के कटाव से जमीन और आसपास की बस्तियों को नुकसान पहुंचने की चिंता लंबे समय से जताई जाती रही है। हालांकि, घाटाल मास्टर प्लान और मालदा में गंगा कटाव से निपटने के उपाय अलग-अलग क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े हैं। इसलिए दोनों के लिए प्रस्तावित कामों और सरकारी घोषणाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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अब लोगों की नजर काम की रफ्तार पर

घाटाल मास्टर प्लान के लिए 1,200 करोड़ रुपये का आवंटन और केंद्र-राज्य की साझा भागीदारी बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। लेकिन स्थानीय लोगों के लिए असली राहत तब होगी, जब जरूरी निर्माण कार्य समय पर पूरे हों और अगले मानसून में पानी भरने की समस्या में वास्तविक कमी दिखाई दे। जून 2027 तक परियोजना के बड़े हिस्से को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Location :  Kolkata

Published :  27 October 2026, 9:22 PM IST