हार्ट हेल्थ के लिए बेस्ट कौन? जानिए सरसों और जैतून ऑयल में से किसका चुनाव है सही
हार्ट पेशेंट के लिए सरसों का तेल बेहतर है या जैतून का? जानिए दोनों तेलों के पोषक तत्वों, दिल की सेहत पर असर और भारतीय कुकिंग के हिसाब से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है, इसकी पूरी जानकारी।
खाना पकाने के लिए सही तेल का चुनाव करना दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। आजकल बाजार में कई तरह के तेल उपलब्ध हैं, लेकिन पारंपरिक सरसों का तेल और विदेशी ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) हमेशा चर्चा में रहते हैं। दिल के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से कौन सा तेल उनके लिए ज्यादा फायदेमंद है। आइए इस रिपोर्ट में आसान भाषा में जानते हैं कि हार्ट पेशेंट को किस तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। (सोर्स-Pinterest)
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पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सभी फैट दिल के लिए नुकसानदायक नहीं होते हैं। ट्रांस फैट और जरूरत से ज्यादा सैचुरेटेड फैट दिल की सेहत बिगाड़ सकते हैं, जबकि गुड फैट यानी मोनोअनसैचुरेटेड फैट और ओमेगा-3 फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसी वजह से हार्ट हेल्थ के लिए सरसों और ऑलिव ऑयल दोनों को महत्वपूर्ण माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
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जैतून का तेल (खासतौर पर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल) मोनोअनसैचुरेटेड फैट और ओलिक एसिड से भरपूर होता है। इसमें पॉलीफेनॉल जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। यह तेल गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बेहतर बनाने और धमनियों में ब्लॉकेज के खतरे को रोकने में मददगार माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
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ऑलिव ऑयल दिल के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन भारतीय रसोई के तरीके थोड़े अलग होते हैं। हमारे यहां डीप फ्राई, तेज तड़का और लंबे समय तक पकाने का चलन है। ज्यादा तापमान पर पकाने से एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के पोषक तत्व कम हो सकते हैं। साथ ही, इसका स्वाद हर भारतीय व्यंजन में मेल नहीं खाता है और यह बजट में भी काफी महंगा पड़ता है। (सोर्स-Pinterest)
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सरसों का तेल सदियों से भारतीय खानपान का अहम हिस्सा रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट के साथ-साथ अल्फा-लिनोलेनिक एसिड यानी ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो दिल की सूजन को कम करने में सहायक है। इसका स्मोकिंग पॉइंट (धूम्र बिंदु) काफी ऊंचा होता है, जिस वजह से यह भारतीय स्टाइल की डीप फ्राई और तेज आंच वाली कुकिंग के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
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हार्ट हेल्थ के लिहाज से ऑलिव ऑयल वैज्ञानिक रूप से बेहद फायदेमंद है, लेकिन भारतीय कुकिंग स्टाइल को देखते हुए सरसों का तेल भी एक बेहतरीन और सुलभ विकल्प है। दिल के मरीजों को चाहिए कि वे किसी एक तेल पर निर्भर रहने के बजाय विविधता रखें या अपने डॉक्टर व डाइटीशियन की सलाह के अनुसार संतुलित मात्रा में ही तेल का इस्तेमाल करें। (सोर्स-Pinterest)
खाना पकाने के लिए सही तेल का चुनाव करना दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। आजकल बाजार में कई तरह के तेल उपलब्ध हैं, लेकिन पारंपरिक सरसों का तेल और विदेशी ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल) हमेशा चर्चा में रहते हैं। दिल के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से कौन सा तेल उनके लिए ज्यादा फायदेमंद है। आइए इस रिपोर्ट में आसान भाषा में जानते हैं कि हार्ट पेशेंट को किस तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। (सोर्स-Pinterest)
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सभी फैट दिल के लिए नुकसानदायक नहीं होते हैं। ट्रांस फैट और जरूरत से ज्यादा सैचुरेटेड फैट दिल की सेहत बिगाड़ सकते हैं, जबकि गुड फैट यानी मोनोअनसैचुरेटेड फैट और ओमेगा-3 फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसी वजह से हार्ट हेल्थ के लिए सरसों और ऑलिव ऑयल दोनों को महत्वपूर्ण माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
जैतून का तेल (खासतौर पर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल) मोनोअनसैचुरेटेड फैट और ओलिक एसिड से भरपूर होता है। इसमें पॉलीफेनॉल जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। यह तेल गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बेहतर बनाने और धमनियों में ब्लॉकेज के खतरे को रोकने में मददगार माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
ऑलिव ऑयल दिल के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन भारतीय रसोई के तरीके थोड़े अलग होते हैं। हमारे यहां डीप फ्राई, तेज तड़का और लंबे समय तक पकाने का चलन है। ज्यादा तापमान पर पकाने से एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के पोषक तत्व कम हो सकते हैं। साथ ही, इसका स्वाद हर भारतीय व्यंजन में मेल नहीं खाता है और यह बजट में भी काफी महंगा पड़ता है। (सोर्स-Pinterest)
सरसों का तेल सदियों से भारतीय खानपान का अहम हिस्सा रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट के साथ-साथ अल्फा-लिनोलेनिक एसिड यानी ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो दिल की सूजन को कम करने में सहायक है। इसका स्मोकिंग पॉइंट (धूम्र बिंदु) काफी ऊंचा होता है, जिस वजह से यह भारतीय स्टाइल की डीप फ्राई और तेज आंच वाली कुकिंग के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। (सोर्स-Pinterest)
हार्ट हेल्थ के लिहाज से ऑलिव ऑयल वैज्ञानिक रूप से बेहद फायदेमंद है, लेकिन भारतीय कुकिंग स्टाइल को देखते हुए सरसों का तेल भी एक बेहतरीन और सुलभ विकल्प है। दिल के मरीजों को चाहिए कि वे किसी एक तेल पर निर्भर रहने के बजाय विविधता रखें या अपने डॉक्टर व डाइटीशियन की सलाह के अनुसार संतुलित मात्रा में ही तेल का इस्तेमाल करें। (सोर्स-Pinterest)