पति-ससुराल पर गंभीर आरोप लगाने वाली महिला नहीं दे सकी सबूत, कोर्ट ने की याचिका खारिज

घरेलू हिंसा के मामले में सिर्फ आरोप लगाने से अदालत से राहत नहीं मिल सकती। पीड़ित महिला को अपने साथ हुई मारपीट, प्रताड़ना या दुर्व्यवहार के आरोपों को सबूतों के आधार पर साबित करना भी जरूरी है। महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी तरह की राहत पाने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि महिला के साथ वास्तव में हिंसा या प्रताड़ना हुई है। केवल शिकायत या आरोप के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 4 November 2026, 10:20 AM IST
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New Delhi: घरेलू हिंसा के मामले में सिर्फ आरोप लगाने से अदालत से राहत नहीं मिल सकती। पीड़ित महिला को अपने साथ हुई मारपीट, प्रताड़ना या दुर्व्यवहार के आरोपों को सबूतों के आधार पर साबित करना भी जरूरी है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। अदालत ने महिला की ओर से पति और ससुराल वालों के खिलाफ दायर घरेलू हिंसा की याचिका खारिज कर दी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋषिका श्रीवास्तव की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी तरह की राहत पाने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि महिला के साथ वास्तव में हिंसा या प्रताड़ना हुई है। केवल शिकायत या आरोप के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

पति और ससुराल वालों पर लगाए थे गंभीर आरोप

महिला ने अपने पति, सास-ससुर और परिवार के दूसरे सदस्यों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि ससुराल में उसे शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया। उसने दहेज मांगने, धमकी देने और यौन शोषण जैसे आरोप भी लगाए थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि उसका पति अश्लील तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देता था। इसके अलावा, उसने पति पर अपने पिता से 35 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया था।

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पति और ससुराल वालों पर लगाए आरोप( AI Generated ig)

हर महीने 40 हजार रुपये गुजारा भत्ता मांगा

महिला ने अदालत से अपने और अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने तथा रहने की व्यवस्था कराने की मांग की थी। इसके साथ ही उसने हर महीने 40 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने और मानसिक परेशानी के बदले 50 लाख रुपये मुआवजा दिलाने की अपील भी की थी। हालांकि, अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद महिला की याचिका खारिज कर दी।

तीन बार मौका मिलने पर भी महिला नहीं दे सकी सबूत, कोर्ट ने खारिज की याचिका

वहीं, पति और ससुराल वालों की ओर से पेश वकील ने महिला के सभी आरोपों को गलत बताया। बचाव पक्ष का कहना था कि जनवरी 2021 में 10 लाख रुपये देकर दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझा लिया गया था। वकील ने यह भी दावा किया कि महिला हर महीने 75 हजार रुपये से ज्यादा कमाती है और वह अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला को अपने आरोप साबित करने के लिए तीन बार मौका दिया गया था। इसके बावजूद उसने न तो अपना सबूतों वाला हलफनामा जमा किया और न ही आरोपों के समर्थन में कोई अन्य कदम उठाया। इसके बाद 26 सितंबर को अदालत ने उसका सबूत पेश करने का अधिकार खत्म कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर कोई पक्ष अपना जवाब देने के लिए अदालत में पेश नहीं होता है या मामले की सुनवाई एकतरफा होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे पक्ष के सभी आरोप सही मान लिए जाएंगे। शिकायत करने वाले को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देने ही होंगे। अदालत के मुताबिक, महिला अपने आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रही। इसी वजह से पति और ससुर के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप साबित नहीं हो सके और महिला की याचिका खारिज कर दी गई।

Location :  New Delhi

Published :  4 November 2026, 10:20 AM IST

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