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दिल्ली आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया। अदालत ने सीबीआई की जांच और चार्जशीट में गंभीर खामियां बताते हुए कड़ी फटकार लगाई।
केजरीवाल-सिसोदिया बरी, जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की चार्जशीट ठुकराई (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाला मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में बरी कर दिया। यह फैसला विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने सुनाया। अदालत ने न सिर्फ दोनों नेताओं को आरोपों से मुक्त किया, बल्कि जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। इस पूरे घटनाक्रम में जज जितेंद्र सिंह की भूमिका और उनकी टिप्पणियां चर्चा के केंद्र में हैं।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे वर्तमान में नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज (पीसी एक्ट) सीबीआई-01 के पद पर तैनात हैं। वे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं, खासतौर पर वे मामले जिनकी जांच Central Bureau of Investigation (सीबीआई) करती है।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की है और लंबे समय से आपराधिक मामलों की सुनवाई का अनुभव रखते हैं। अक्टूबर 2024 में उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) के रूप में पदोन्नत किया गया था। न्यायिक गलियारों में उन्हें सख्त, तथ्यों पर आधारित निर्णय देने वाले और प्रक्रिया के प्रति बेहद सजग जज के रूप में जाना जाता है।
फैसला सुनाते समय जज जितेंद्र सिंह ने साफ कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में "गंभीर कमियां" हैं। उन्होंने कहा कि आरोपों को किसी ठोस साक्ष्य, गवाह या विश्वसनीय बयान का समर्थन नहीं मिला। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसी ने अनुमान के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की।
जज ने कहा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला नहीं बनता। वहीं अरविंद केजरीवाल को भी बिना पर्याप्त साक्ष्य के आरोपी बनाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
विशेष जज ने चार्जशीट में प्रयुक्त 'साउथ लॉबी' जैसे शब्दों पर आपत्ति जताई और पूछा कि इसका ठोस आधार क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित कंफेशनल स्टेटमेंट की कॉपी रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई, जो जांच की गंभीर कमी दर्शाती है।
अदालत ने कहा कि निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। यदि जांच ही कमजोर और पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगी, तो न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होगी। जज ने साफ शब्दों में कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी व्यक्ति को आरोपी बनाना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
राउज एवेन्यू कोर्ट से केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने के बाद गरमाई दिल्ली की राजनीति
अदालत ने सिर्फ केजरीवाल और सिसोदिया ही नहीं, बल्कि इस मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया। किसी के खिलाफ भी आरोप तय करने से इनकार कर दिया गया। सुनवाई के दौरान कई आरोपी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, जबकि कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
फैसला सुनते समय कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया। जज ने सभी वकीलों का धन्यवाद किया और कहा कि अदालत तथ्यों और कानून के आधार पर ही निर्णय देती है, न कि सार्वजनिक धारणा या राजनीतिक दबाव के आधार पर।
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मनीष सिसोदिया को फरवरी 2023 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि अरविंद केजरीवाल को मार्च 2024 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया।
अब संभावना जताई जा रही है कि सीबीआई इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है। एजेंसी कानूनी राय ले रही है और जल्द अपील दायर करने पर निर्णय ले सकती है।
फिलहाल, इस फैसले ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है। और इस बहस के केंद्र में हैं- विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह, जिनके फैसले ने इस बहुचर्चित मामले की दिशा ही बदल दी।