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दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर चर्चा के दौरान भारी हंगामा हुआ। शोर-शराबे के चलते आप के दो विधायकों को मार्शल आउट किया गया। बीजेपी ने गंदे पानी और प्रदूषण के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर बवाल
New Delhi: दिल्ली विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब राजधानी में लगातार गंभीर होते प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई। जैसे ही यह विषय सदन के पटल पर आया, आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। नारेबाजी और व्यवधान के चलते सदन की कार्यवाही बाधित होने लगी। हालात बिगड़ते देख विधानसभा अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए आप विधायक कुलदीप कुमार और जरनैल सिंह को मार्शल आउट कर सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।
लगातार हो रहे हंगामे से नाराज विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदूषण दिल्ली के लोगों से जुड़ा बेहद गंभीर और जनहित का मुद्दा है, जिस पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए। अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सदन में अनुशासन नहीं रखा गया तो और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद मार्शलों की मदद से दोनों आप विधायकों को सदन से बाहर ले जाया गया।
विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता की मौजूदगी में विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के सभी सदस्यों से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता प्रदूषण से त्रस्त है और उनसे जुड़े सवालों का जवाब इस सदन में मिलना चाहिए। अध्यक्ष ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे हंगामा छोड़कर सार्थक चर्चा में हिस्सा लें, ताकि किसी ठोस समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
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दिल्ली में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण लंबे समय से बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सत्र के दौरान जैसे ही इस विषय पर चर्चा शुरू हुई, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। आम आदमी पार्टी के विधायक सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे, वहीं भाजपा विधायक पिछली सरकार की नीतियों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इसी सियासी टकराव के चलते सदन का माहौल गर्म हो गया।
मालवीय नगर से बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय ने चर्चा के दौरान पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र मालवीय नगर में लोगों को गंदा पानी मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। सतीश उपाध्याय के मुताबिक मस्जिद मोठ, खिड़की हौजरानी और बेगमपुर जैसे इलाकों में लगातार दूषित पानी की शिकायतें मिल रही हैं।
बीजेपी विधायक ने कहा कि गंदा पानी और बढ़ता प्रदूषण सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने मांग की कि प्रदूषण और दूषित पानी के मुद्दे पर जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी के विधायकों का कहना था कि मौजूदा सरकार प्रदूषण रोकने में पूरी तरह विफल रही है। आप विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा केवल आरोप लगाने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आप नेताओं का कहना था कि दिल्ली की हवा और पानी दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं, लेकिन सरकार के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।
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लगातार हंगामे और मार्शल आउट की कार्रवाई के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही। हालांकि बाद में अध्यक्ष के हस्तक्षेप से स्थिति संभली और चर्चा आगे बढ़ाई गई। लेकिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तल्खी साफ नजर आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में प्रदूषण अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य संकट बन चुका है। विधानसभा में हो रही बहस से यह साफ है कि सभी दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुना रहे हैं, लेकिन ठोस समाधान पर सहमति बनाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।