ट्रेन 8 घंटे 48 मिनट लेट हुई तो यात्री पहुंचा कोर्ट, रेलवे को अब देने होंगे 35 हजार रुपये

झारखंड में ट्रेन के 8 घंटे 48 मिनट देरी से पहुंचने पर परेशान यात्री ने रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। सरायकेला आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को 30 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 September 2026, 2:40 PM IST

New Delhi: ट्रेन के घंटों देरी से चलने और यात्रियों को परेशानी होने की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन झारखंड में ट्रेन की देरी से परेशान एक यात्री ने रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले में सरायकेला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को कुल 35,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने ट्रेन की करीब 9 घंटे की देरी से यात्री को हुई शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया।

ट्रेन पहुंची 528 मिनट देरी से

मामला सितंबर 2024 का है। शिकायतकर्ता ने टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की दो टिकट बुक की थीं। ट्रेन को टाटानगर से सुबह 10:18 बजे रवाना होकर दोपहर 3:50 बजे संबलपुर पहुंचना था। हालांकि, ट्रेन निर्धारित समय से देरी से रवाना हुई और संबलपुर पहुंचने में 528 मिनट यानी 8 घंटे 48 मिनट की देरी हो गई।

4.50 लाख रुपये मुआवजे की मांग

ट्रेन की लंबी देरी से परेशान यात्री ने रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर 4.50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। यात्री का कहना था कि ट्रेन की देरी के कारण उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

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रेलवे ने क्या दलील दी?

रेलवे ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि यात्री ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे ट्रेन की देरी के कारण हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का पता चल सके। रेलवे ने यह दलील भी दी कि मामले की सुनवाई उपभोक्ता आयोग के बजाय रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल एक्ट, 1987 के तहत होनी चाहिए।

आयोग ने रेलवे की दलील खारिज की

सरायकेला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे की क्षेत्राधिकार संबंधी दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामले की सुनवाई उपभोक्ता आयोग कर सकता है। आयोग ने यह भी माना कि रेलवे यह साबित करने में विफल रहा कि ट्रेन की देरी ऐसी परिस्थितियों के कारण हुई थी, जो उसके नियंत्रण से बाहर थीं।

रेलवे को 45 दिन में करना होगा भुगतान

आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को 30,000 रुपये मानसिक और अन्य परेशानियों के मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया। इसके अलावा 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने होंगे। इस तरह रेलवे को कुल 35,000 रुपये का भुगतान करना होगा। आयोग ने आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर राशि देने का निर्देश दिया है। भुगतान में देरी होने पर रेलवे को 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

Location :  New Delhi

Published :  21 September 2026, 2:40 PM IST