ऐसे तो बंद हो जाएंगे रामायण-महाभारत: ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म पर बैन की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने दी ये बड़ी नसीहत

एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार। जगन्नाथ मंदिर समिति की स्पाइडर-मैन वाली दलील खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा- कला को बंधक नहीं बनाया जा सकता, वरना रामायण-महाभारत का प्रसारण भी रुक जाएगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 July 2026, 10:50 AM IST

New Delhi: क्या धार्मिक देवी-देवताओं पर बनी एनिमेटेड फिल्में हमारी आस्था को ठेस पहुंचाती हैं या फिर ये बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का नया माध्यम हैं? सुप्रीम कोर्ट ने 'महाप्रभु जगन्नाथ' नाम की एनिमेटेड फिल्म पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए एक बेहद दूरदर्शी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि कला और क्रिएटिविटी को आस्था की अति-संवेदनशीलता की बेड़ियों में नहीं जकड़ा जा सकता।

स्पाइडर-मैन और डोरेमोन वाली दलील खारिज

जगन्नाथ मंदिर समिति की ओर से ओडिशा के एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि भगवान जगन्नाथ को 'स्पाइडर-मैन या डोरेमोन' जैसे कार्टून कैरेक्टर की तरह नहीं दिखाया जा सकता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस दलील को सिरे से नकार दिया।

निर्माताओं के वकील देवदत्त कामत ने भी कोर्ट को बताया कि फिल्म में देवता का कोई अपमान नहीं किया गया है, बल्कि इसे बच्चों को ध्यान में रखकर बेहद सम्मानजनक तरीके से बनाया गया है।

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अगर ऐसी रोक लगी तो टीवी से गायब हो जाएंगे रामायण और महाभारत

अदालत ने मंदिर समिति को करारा जवाब देते हुए कहा कि भारत में वाल्मीकि, स्कंद और कबीर रामायण जैसे कई कला रूप मौजूद हैं और हर राज्य की अपनी रचनाशीलता है।

कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस तरह की आपत्तियों पर रोक लगाई जाने लगी, तो देश में हिंदू देवी-देवताओं, रामायण और महाभारत से जुड़ी कोई भी पेंटिंग, मूर्ति या टीवी सीरियल नहीं बन पाएगा। अदालतों का काम कलाकारों के रास्ते में रोड़ा अटकाना नहीं, बल्कि कलात्मक अभिव्यक्ति की रक्षा करना है।

सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि जब देश की कानूनी संस्था 'सेंसर बोर्ड' ने फिल्म को हरी झंडी दे दी है, तो महज कुछ लोगों की संवेदनशीलता के कारण इसे रोका नहीं जा सकता। एनिमेटेड फिल्में नई पीढ़ी और बच्चों को पौराणिक गाथाओं से परिचित कराने का जरिया हैं।

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पुराने दौर में हर रात होने वाले यशोधाम (नाटकों) का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि कलाकारों को इस तरह बंधक बनाकर काम नहीं कराया जा सकता। 17 जुलाई के आदेश को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।

Location :  New Delhi

Published :  30 July 2026, 10:50 AM IST