विरोध का ‘पाई-पाई’ हिसाब: जंतर-मंतर आंदोलन की परते खोलेंगी सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय स्पेशल टीमें

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी गठित की है। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 20 August 2026, 6:39 PM IST

New Delhi: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर लगाए गए बल प्रयोग के आरोपों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के हर पहलू की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन किया है। कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।

कमेटी में कौन-कौन शामिल?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित पांच सदस्यीय कमेटी में अलग-अलग संवैधानिक और पुलिस पदों पर काम कर चुके अधिकारियों और न्यायाधीशों को शामिल किया गया है।

कमेटी में शामिल सदस्य हैं

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी - सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और कमेटी के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा - पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • जस्टिस शलिंदर कौर - दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश
  • ऋषि कुमार शुक्ला - CBI के पूर्व निदेशक
  • डॉ. एलआर बिश्नोई - मेघालय के सेवानिवृत्त DGP

पुलिस पर लगे थे बल प्रयोग के गंभीर आरोप

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान CJP समर्थकों ने पुलिस पर पैलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा और भीड़ को नियंत्रित करने के पुलिस के तरीके पर भी सवाल उठाए गए थे।

इन्हीं आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं।

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20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुआ था विवाद

CJP समर्थकों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का प्रयास किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया, जबकि दिल्ली पुलिस ने अपने बचाव में अलग दावा किया।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च गैरकानूनी था, क्योंकि इसके लिए अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर के प्रदर्शन में कुछ हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हो गए थे। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, लेकिन पुलिस के अनुसार बल का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा नहीं किया गया।

49 दिन चला था CJP का प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था और 49 दिनों तक चला। 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद विवाद और बढ़ गया। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया, जबकि CJP की ओर से पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए। पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई थी।

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अब कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी अब प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं, पुलिस की कार्रवाई, बल प्रयोग की आवश्यकता और प्रदर्शनकारियों के आरोपों समेत पूरे मामले की जांच करेगी। कमेटी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद की निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो गया है।

Location :  New Delhi

Published :  20 August 2026, 6:39 PM IST