सेवा तीर्थ के नाम से शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को नया नाम और पता मिल गया। पीएम मोदी ने इस मौके पर सेवा तीर्थ से अपना पहला भाषण दिया। जानिये क्या-क्या बोले पीएम मोदी

सेवा तीर्थ में संबोधित करते पीएम नरेन्द्र मोदी
New Delhi: देश के प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई मंत्रालयों को शुक्रवार को नया नाम और पता मिल गया। पीएमओ को अब सेवा तीर्थ के नाम से जाना जायेगा। सेवा तीर्थ में कई मंत्रालय भी है। सेवा तीर्थ से पीएम मोदी ने पहला भाषण दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है। ये भवन हमें याद दिलायेगा कि सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है।
पीएमओ के नये नाम और पते से पीएम मोदी का पहला संबोधन
पीएम मोदी बोले- गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया गया है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिये गुलामी की मानसिकता को बदलना जरूरी है।#SeveTreeth #PMO @PMOIndia @narendramodi pic.twitter.com/fHfil5m3Y7
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 13, 2026
पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया गया है। जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना ही सेवा तीर्थ का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है।
सेवा तीर्थ में संबोधित करते पीएम नरेन्द्र मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक अहम निर्णय हुए, नीतियां बनीं लेकिन ये भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थीं। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।
पीएम ने कहा कि रायसीना हिल्स के इन भवनों के उद्घाटन के वक्त उस समय के वायसराय ने कहा था कि ये भवन ब्रिटिश सम्राट की इच्छाओं के अनुरूप बने हैं. यानी ये भवन ब्रिटेन के महाराजा की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम थे। रायसीना हिल्स का चुनाव भी इसलिए किया गया ताकि ये इमारतें दूसरी इमारतों से ऊपर रहें, कोई उनकी बराबरी न कर सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ का ये परिसर किसी पहाड़ी पर न होकर जमीन से ज्यादा जुड़ा है।मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वो किसी महाराजा की सोच को नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे।
पीएम ने बताया कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत सरकार के अनेकों मंत्रालय दिल्ली के 50 से ज्यादा अलग-अलग स्थानों से चल रहे हैं। हर साल इन मंत्रालयों की इमारतों के किराए पर ही प्रतिवर्ष डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
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हर रोज 8-10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में आने-जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था. अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और कर्मचारियों के समय की इस बचत से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।