
पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के लिए निर्धारित की है।
सज्जन कुमार ने अपनी याचिका में कहा था कि वह पिछले 7 साल और 4 महीने से जेल में बंद हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। कुमार ने यह भी कहा कि वह अब तक अपनी पत्नी से एक बार भी नहीं मिल पाए हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन मानवीय आधारों को पर्याप्त नहीं माना और उनकी मांग को ठुकरा दिया।
इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, लेकिन 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। यही फैसला उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई का आधार बना।
इससे पहले जनकपुरी और विकासपुरी क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। इस हिंसा में दो लोगों की मौत हुई थी। उस मामले में कुमार ने अपने बचाव में कहा था कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
मामले के दोबारा सामने आने के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) ने फरवरी 2015 में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मारने के मामले में दर्ज की गई थी।
7 जुलाई 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट में अपने बयान के दौरान सज्जन कुमार ने खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा था कि वह 1984 के दंगों में कभी शामिल नहीं रहे। कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने निष्पक्ष जांच नहीं की और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए।
यह ध्यान देने वाली बात है कि सज्जन कुमार पहले से ही 1984 दंगों के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था।
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इसके अलावा, सरस्वती विहार में 1 नवंबर 1984 को सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को एक मामले में जमानत या बरी कर दिया जाता है, लेकिन वह किसी अन्य मामले में सजा काट रहा हो, तो उसे रिहा नहीं किया जाता। यही कारण है कि एक मामले में राहत मिलने के बावजूद सज्जन कुमार जेल से बाहर नहीं आ सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए अगली सुनवाई जुलाई में तय की है। इस मामले पर अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
Location : New Delhi
Published : 24 April 2026, 1:19 PM IST