तेल, बिजली और ड्रोन की जंग: रूस-यूक्रेन युद्ध में अब किसकी सांस पहले टूटेगी?

रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ सीमा की लड़ाई नहीं रहा। यूक्रेन रूस की रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, जबकि रूस यूक्रेन के शहरों, बिजली ग्रिड और रसद तंत्र पर हमला कर रहा है। भारी सैन्य नुकसान के बीच दोनों देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 5 July 2026, 9:28 AM IST
google-preferred

New Delhi: रूस-यूक्रेन संघर्ष जुलाई 2026 तक ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां जीत-हार सिर्फ शहरों पर कब्जे से तय नहीं हो रही, बल्कि तेल, बिजली और सप्लाई सिस्टम पर नियंत्रण से भी तय हो रही है। दोनों देशों की रणनीति अब साफ है। दुश्मन की युद्ध लड़ने की क्षमता को उसकी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर चोट करके कमजोर करना।

रूस को मोर्चे पर बढ़त, लेकिन घर में संकट

रूस ने पूर्वी यूक्रेन के कई इलाकों में बढ़त के दावे किए हैं। उसने लुहांस्क पर नियंत्रण और डोनेत्स्क क्षेत्र में आगे बढ़ने की बात कही है, हालांकि यूक्रेन कई दावों को खारिज कर रहा है। इसी बीच रूस की असली परेशानी अपने घर के अंदर दिख रही है, जहां यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण तेल रिफाइनरियां और ईंधन सप्लाई सिस्टम प्रभावित हुए हैं।

तेल उत्पादक रूस को पेट्रोल आयात क्यों करना पड़ा?

यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों, डिपो और टर्मिनलों पर लगातार हमले किए हैं। इसी वजह से रूस में पेट्रोल की कमी, कतारें और राशनिंग जैसी स्थिति बनी। Reuters के मुताबिक रूस ने ईंधन संकट से निपटने के लिए भारत से कम से कम 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल मंगाया। रिपोर्ट्स में नायरा एनर्जी से जुड़े शिपमेंट का भी जिक्र है, जो अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के जरिए रूस पहुंचा।

यूक्रेन पर रूस की जवाबी रणनीति

रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमले कर रहा है। यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार 2025-26 की सर्दियों में रूसी बलों ने यूक्रेन की ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण सुविधाओं को बार-बार निशाना बनाया। इससे यूक्रेन की बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।

सैनिक नुकसान ने बढ़ाई दोनों देशों की चुनौती

CSIS की रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में कुल सैन्य हताहतों की संख्या 20 लाख से अधिक पहुंच गई है। इसमें रूस को लगभग 14 लाख और यूक्रेन को 5.25 लाख से 6.25 लाख तक सैन्य हताहतों का अनुमान बताया गया है। रूस की सैनिक क्षति यूक्रेन से कहीं अधिक मानी जा रही है।

और कितनी गिरेगी मानवता: गाजियाबाद ने 60 साल के व्यक्ति ने 2 वर्षीय बच्ची को बनाया हवस का शिकार

यूक्रेन की रणनीति: रूस के भीतर चोट

यूक्रेन अब लंबी दूरी के ड्रोन हमलों से रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध फंडिंग पर चोट कर रहा है। हाल ही में सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनल और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ड्रोन हमले की खबर सामने आई। यूक्रेन इसे रूस के युद्ध राजस्व पर दबाव बनाने की रणनीति बता रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  5 July 2026, 9:07 AM IST

Related News

No related posts found.

Advertisement