SIR पर बनेगी SIT! सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने के दावों और चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की मांग की गई है...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 25 September 2026, 2:29 PM IST

New Delhi: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई मौकों पर आपत्ति जताई थी।

याचिका में फैसलों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कोई फैसला लिया गया है तो उसे गैर-कानूनी घोषित किया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले ऐसे थे, जिन पर बाकी चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी। इनमें फॉर्म 6 में बदलाव और चुनावी रोल डेटा के प्रबंधन से जुड़े फैसले शामिल बताए गए हैं।

13 करोड़ नाम हटाने के दावे की जांच की मांग

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13 करोड़ नामों की जांच के लिए SIT गठित की जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटाने की प्रक्रिया कैसे हुई और क्या इसमें तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।

RP एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग

याचिका में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया जाए कि वह संबंधित शिकायतों को दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करें। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।

फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर उठे थे सवाल

याचिका के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मई 2026 में फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार विवेक जोशी ने कहा था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में जरूरी संशोधन किए बिना कानूनी फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया था। अब इसी मुद्दे को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई और आगे की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

Location :  New Delhi

Published :  25 September 2026, 2:23 PM IST