स्लीपर बस और पार्क गैंगरेप पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: पूछा-आखिर कब सुधरेगी राजधानी की कानून-व्यवस्था?

दिल्ली और एनसीआर में हाल ही में बढ़े बलात्कार के मामलों पर खुद संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को यौन अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा करना चाहिए कि वे अपराध करने से डरें।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 October 2026, 1:09 PM IST

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में हाल ही में हुए यौन अपराधों के मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए क्या असरदार कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिसमें यौन अपराध करने की प्रवृत्ति वाले लोगों में कानून का असली डर हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक अपराधियों को यौन अपराध करने के गंभीर नतीजों का डर नहीं होगा तब तक हालात में मनचाहा बदलाव नहीं आएगा। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि राजधानी में महिलाओं को रात में भी सुरक्षित महसूस होना चाहिए।

साउथ दिल्ली गैंग-रेप मामले में पुलिस से सवाल

साउथ दिल्ली के एक पार्क में हाल ही में हुए गैंगरेप मामले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा सकते थे। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर स्थानीय लोगों ने पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों या असामाजिक तत्वों के बारे में जानकारी दी थी, तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए पुलिस की रणनीति के बारे में पूछा। कोर्ट ने कहा कि मकसद सिर्फ घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिससे ऐसे अपराध होने की संभावना कम से कम हो।

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रात 10 बजे भी सुरक्षित महसूस करें महिलाएं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहां महिला रात 10 बजे भी सुरक्षित महसूस करे। कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में यौन अपराधों पर लगाम लगाने के मकसद से प्रस्तावित 'वॉर रूम' के बारे में दिल्ली पुलिस से जानकारी मांगी। साथ ही कोर्ट ने अपराधियों की पहचान करने और उन पर नजर रखने के लिए उपलब्ध टेक्नोलॉजी और पुलिस डेटाबेस के असरदार इस्तेमाल पर जोर दिया।

कॉलेजों और अनधिकृत इलाकों में निगरानी की जरूरत

सुनवाई के दौरान कॉलेजों और छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि जो लोग शिक्षण संस्थानों के आस-पास छात्राओं को परेशान करते हैं या लगातार उनका पीछा करते हैं, उन पर नजर रखने की जरूरत है। कोर्ट ने दिल्ली में अनधिकृत खाने-पीने की जगहों और ऐसी जगहों पर भी चिंता जताई जहां असामाजिक तत्व इकट्ठा होते हैं। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे ऐसे इलाकों की पहचान करें और वहां निगरानी और कानून लागू करने के उपायों को मजबूत करें।

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निर्भया मामले का जिक्र

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने 2012 के निर्भया मामले का भी जिक्र किया। उस मामले की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने अपराध करने से पहले आरोपी के व्यवहार और उस समय की परिस्थितियों पर ध्यान देने की अहमियत पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी घटना के बाद जांच और गिरफ्तारी ही काफी नहीं है; पुलिस को अपराध रोकने पर भी उतना ही जोर देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए आने वाले हफ्तों में ठोस और असरदार कदम उठाए जाने चाहिए।

Location :  New Delhi

Published :  5 October 2026, 1:03 PM IST